
नईदुनिया प्रतिनिधि,अनूपपुर। अभियान के दौरान वन मंडल अधिकारी डेविड चेन्नाप और उपवन मंडल अधिकारी प्रीतेश पकालें ने स्वयं मैदानी अमले के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में उतरकर गश्त का नेतृत्व किया।
सुरक्षा घेरे को और अधिक कड़ा करने के उद्देश्य से जैतहरी, राजेन्द्रग्राम, कोतमा और अमरकंटक परिक्षेत्रों की टीमों ने आपसी समन्वय स्थापित कर संयुक्त गश्त की। प्रतिकूल मौसम और भीषण तूफान जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद विभाग का अमला पूरी रात मैदानी स्तर पर मुस्तैद रहा।
अभियान के दौरान हाथियों की सटीक लोकेशन और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया गया। नाइट विजन (इन्फ्रारेड ड्रोन) के माध्यम से हाथियों के मूवमेंट की निरंतर ट्रैकिंग की गई, जिसकी सहायता से उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने के समय रोकने में सफलता मिली।
तकनीकी निगरानी के साथ-साथ वन विभाग की टीम ने सीधे गावों में पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित किया। ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के व्यावहारिक तरीके समझाए गए और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या मानव-हाथी संघर्ष को टाला जा सके।
विभाग ने इस दौरान प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनशीलता व्यक्त करते हुए यह आश्वस्त किया है कि हाथियों द्वारा किए गए नुकसान के मुआवजा दावों का निपटान मानवीय आधार पर त्वरित रूप से किया जाएगा, ताकि प्रभावितों को शीघ्र आर्थिक राहत मिल सके।