
नवदुनिया प्रतिनिधि, अशोकनगर। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर चंदेरी में सामने आए एक मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आवेदक राघवेंद्र चौबे ने जनसुनवाई में शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि चंदेरी क्षेत्र में ऐसे विद्यालय भी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर संचालित दर्शाए जा रहे हैं, जो धरातल पर मौजूद नहीं हैं। उन्होंने अपनी बच्ची के आरटीई के तहत प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम चंदेरी मनीष धनगर ने संबंधित स्कूल संचालक को जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। हालांकि, शिकायत के संबंध में बुलाए जाने के बावजूद संबंधित स्कूल संचालक जनसुनवाई में उपस्थित नहीं हुए।
इसके बाद एसडीएम ने मौजूद बीआरसी प्रतिनिधि को फटकार लगाते हुए विद्यालय के संचालन और पोर्टल पर दर्ज जानकारी को लेकर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
मामले में संबंधित स्कूल संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई है। पोर्टल की जानकारी पर सवाल मामले ने शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड और विद्यालयों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि कोई विद्यालय धरातल पर संचालित नहीं है तो वह विभागीय पोर्टल पर संचालित विद्यालय के रूप में दर्ज कैसे हुआ? विद्यालय को मान्यता, पंजीयन अथवा आरटीई प्रक्रिया में शामिल करने से पहले उसका भौतिक सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया? यदि सत्यापन किया गया था तो मौके पर विद्यालय नहीं मिलने के बावजूद पोर्टल पर उसकी जानकारी दर्ज कैसे रही? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
शिकायत के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चंदेरी में केवल एक ही ऐसा विद्यालय है, जो पोर्टल पर दर्ज है लेकिन धरातल पर संचालित नहीं है। क्षेत्र के सभी आरटीई पोर्टल पर दर्ज विद्यालयों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
इसी मामले के बीच मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में बीआरसीसी चंदेरी की अनुपस्थिति का मामला भी सामने आया। एसडीएम चंदेरी द्वारा 25 अगस्त 2026 को कलेक्टर अशोकनगर को भेजे गए पत्र में बताया गया कि शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को खंड स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाती है।
इसके बाद विभिन्न शासकीय योजनाओं की खंड स्तरीय समीक्षा भी की जाती है। पत्र के अनुसार 25 अगस्त को जनसुनवाई के दौरान बीआरसीसी वेद प्रकाश गोयल बिना सूचना अनुपस्थित रहे। इसके कारण शिक्षा विभाग से संबंधित शिकायतों का निराकरण नहीं हो सका और विभागीय योजनाओं की समीक्षा भी प्रभावित हुई। एसडीएम ने मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा है।
अब पूरे मामले में जांच महत्वपूर्ण हो गई है। यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आरटीई पोर्टल पर विद्यालयों की जानकारी किस स्तर पर दर्ज की गई, उनका भौतिक सत्यापन कब और किसके द्वारा किया गया तथा गैर-संचालित विद्यालय पोर्टल पर कैसे दर्ज रहा।
यदि जांच में गलत जानकारी दर्ज करने या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित स्कूल संचालक के साथ जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जानी चाहिए। राघवेंद्र चौबे की शिकायत अब केवल उनकी बच्ची के प्रवेश तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि शिक्षा विभाग की निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रही है।
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