
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट: बालाघाट की नगर पालिका अध्यक्ष भारती सुरजीत सिंह ठाकुर की मुश्किलें हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद कई गुना बढ़ गई है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने राज्य सरकार को नपाध्यक्ष पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने के लिए तीन महीने की समय सीमा दी है।
दरअसल, मामला रैन बसेरा के सोफा, डायनिंग टेबल सहित अन्य फर्नीचर का नपाध्यक्ष द्वारा स्वयं के घर में उपयोग करने और नपाध्यक्ष द्वारा अपने निजी वाहन में डीजल भरवाने में भारी हेरफेर करने के आरोपों से जुड़ा है। इस संबंध में पार्षद केवल सोनेकर, सुधीर चिले, श्वेता सौरभ जैन और राज हरिनखेड़े ने इन मामलों की शिकायत स्थानीय स्तर पर कई बार की, लेकिन कहीं से मदद न मिलने पर उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली।
चारों पार्षदों की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी, आनंद शुक्ला और अपूर्व त्रिवेदी ने पैरवी की। न्यायाधीश ने अपने आदेश में साफ किया है कि जांच में अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो नपाध्यक्ष को पद से हटाने की कार्रवाई करें।
आरोप लगाने वाले पार्षदों का कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष भारती सुरजीत सिंह ठाकुर ने स्वयं आदेश पारित कर विधि विरुद्ध ढंग से रैन बसेरा का फर्नीचर स्वयं के उपयोग में अपने वार्ड क्रमांक-25 स्थित घर में किया है। इससे नपाध्यक्ष ने नगर पालिका को आर्थिक क्षति पहुंचाई है। इतना ही नहीं, नपाध्यक्ष अपने निजी चौपहिया वाहन में डीजल भरवाने के संबंध में गलत जानकारी देकर नगर पालिका की निधि का दुरुपयोग कर रही हैं।
आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष की कार की डीजल क्षमता 55 लीटर है, लेकिन उसमें 70 लीटर डीजल भरवाना दर्शाया गया है। इस मुद्दे को लेकर पिछले दिनों पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने भी डीजल कांड की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
पार्षद सुधीर चिले का कहना है कि अगर टंकी की क्षमता 55 लीटर है, तो शेष डीजल कहां उपयोग किया जा रहा है। ये सीधे तौर पर भ्रष्टाचार है। इससे नगर पालिका को अब तक लाखों रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। चिले ने बताया कि भ्रष्टाचार के इन मामलों की शिकायत शासन से की गई थी, लेकिन किसी तरह की न जांच हुई, न कार्रवाई। इसलिए उन्होंने न्यायालय में याचिका दायर की है।
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न्यायालय के आदेश में मेरे विरुद्ध कोई दोष, आरोप या अनियमितता सिद्ध नहीं की गई है। न ही न्यायालय ने प्रकरण के गुण-दोष पर कोई राय रखी है। ईंधन की व्यवस्था निकाय के कर्मचारी करते हैं। जबकि व्यक्तिगत उपयोग में ईंधन स्वयं के व्यय से डलवाया जाता है। निकाय पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं डाला गया है बल्कि बचत की गई है।
मेरे वार्ड-25 स्थित जनसुविधा कार्यालय के संबंध में आरोप भी निराधार हैं। रैन बसेरा से लिया गया फर्नीचर लिखा-पढ़ी, फाइल प्रक्रिया एवं पीआईसी की स्वीकृति के पश्चात बाद जनसुविधा के लिए उपयोग में लिया गया है। कार्यकाल समाप्ति के बाद उसे नगर पालिका को वापस करने का स्पष्ट लेख है। कार्यालय संचालन में नगर पालिका की एक रुपये की राशि भी व्यय नहीं की गई है। हम भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। कुछ लोग स्वार्थ सिद्धी के लिए अनर्गल भ्रष्टाचार के निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं।