
योगेश कुमार गौतम, नईदुनिया, बालाघाट। पाकिस्तान की लाहौर सेंट्रल जेल में सात साल बिताने के बाद मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले का प्रसन्नजीत रंगारी अब अपने घर लौट आया है। जब उससे पूछा गया कि क्या जेल में यातनाएं मिलती थीं तो उसने कहा कि वहां आराम नहीं करने देते थे और परेशान करते थे।
दोबारा पूछने पर उसने जवाब बदलते हुए कहा कि जेल में सब ठीक था। दरअसल, मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते वह स्पष्ट नहीं बोल पा रहा है। प्रसन्नजीत ने बताया कि जेल में सुबह 7.30 बजे नाश्ते में चाय-रोटी मिलती थी। दोपहर 12 बजे खाना मिलता था, जिसमें कभी-कभी मटन-चावल होता थे। वह जेल में सफाई का काम करता था।
प्रसन्नजीत अपनी बड़ी बहन संघमित्रा खोबरागड़े के घर महकेपार में है। उसकी वापसी से पूरा परिवार खुश नजर आया और घर में उत्सव जैसा माहौल था। प्रसन्नजीत ने बताया कि वह जबलपुर से ट्रेन में बैठकर दिल्ली चला गया था। वहां से पाकिस्तान कैसे पहुंचा, उसे पता नहीं।
प्रसन्नजीत ने 2011 में जबलपुर के खालसा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी से बी-फार्मा की पढ़ाई की थी। दिमागी हालात खराब होने के बाद भी प्रसन्नजीत को अपने कॉलेज का नाम कंठस्थ है। उसने एक सांस में कॉलेज का नाम बता दिया। पिता लोपचंद रंगारी ने जमीन बेचकर उसे पढ़ाया था। उसने एम-फार्मा के पहले सेमेस्टर की पढ़ाई की थी। हालांकि प्रसन्नजीत अब आगे की पढ़ाई नहीं करना चाहता।
प्रसन्नजीत ने बताया कि वह अपने बैरक में अकेले रहता था। जिस दिन रिहाई हुई तो जेल में किसी ने उसके पास आकर कहा कि दूसरे कपड़े पहन लो, तुम जा रहे हो। स्वजन ने बताया कि जिस कुर्ता-पायजामा में प्रसन्नजीत पाकिस्तान से रिहा हुआ था, उसी कपड़ों में घर आया था।
कुर्ते पर पाकिस्तान लिखा हुआ था। उन्होंने उन कपड़ों को जला दिया है। बहन संघमित्रा ने कहा कि भाई की दिमागी हालत ठीक नहीं है। उसे पाकिस्तान में बिताए पल याद नहीं हैं। बातचीत करने में भी वह असहज महसूस कर रहा है। उसे सिर्फ बहन, मां और अपने जीजा याद हैं। हमें उसके भविष्य की चिंता सता रही है।
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प्रसन्नजीत की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। प्रशासन की ओर से उसका मेडिकल चेकअप होगा। उसे बेहतर उपचार दिया जाएगा, ताकि वह अच्छी जिंदगी जी सके। - केसी ठाकुर, एसडीएम, कटंगी, बालाघाट