
योगेश कुमार गौतम, नईदुनिया, बालाघाट। कान्हा टाइगर रिजर्व (केटीआर) के रिवाइल्डिंग सेंटर(अनाथ बाघों को प्राकृतिक माहौल में जंगल के अनुकूल ढालने की जगह) में पले-बढ़े 15 बाघ अब टाइगर रिजर्वों की शान बढ़ा रहे हैं। एक अनाथ बाघ अब नौरादेही स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की शान बढ़ा रहा है। 18 जनवरी को उसे नौरादेही स्थानांतरित किया गया है।
वर्ष 2007 में अनाथ शावकों को नया जीवन देने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस सेंटर से अब तक 15 बाघ-बाघिनों को पाल-पोसकर भोपाल के वन विहार, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, नौरादेही टाइगर रिजर्व, संजय टाइगर रिजर्व सहित अन्य रिजर्वों में भेजा जा चुका है।
केटीआर के मुक्की रेंज अंतर्गत घोरेला मैदान में 27 एकड़ क्षेत्रफल में फैला ये सेंटर अनाथ शावकों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में देशभर में पहचान बना चुका है, जहां शावकों को जंगल में रहने लायक तैयार किया जाता है। वर्तमान में रातापानी और पेंच से लाए गए तीन शावक पिछले एक साल से यहां प्रशिक्षण ले रहे हैं।
रिवाइल्डिंग सेंटर करीब 27 एकड़ में फैला है। इसे बाघ पालन क्षेत्र भी कहा जाता है। इस बाड़े में स्थाई जलस्रोत, जंगली घास के मैदान व चट्टान क्षेत्र है। इसके चारों ओर 86 एकड़ में शाकाहारी वन्य प्राणियों का बाड़ा है, जो बाघों के लिए प्राकृतिक शिकार का आधार है।
अनाथ शावकों की देखभाल में खास सावधानी रखी जाती है। दो-तीन माह के शावकों को छिपकर भोजन देते हैं। 13-15 माह के बाद उन्हें 86 एकड़ में बने शाकाहारी जीवों के बाड़े में छोड़ा जाता है, ताकि वो शिकार करना सीख सकें।
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की कम होती संख्या को देखते हुए कुछ वर्ष पहले इसी रिवाइल्डिंग सेंटर से एक अनाथ बाघिन को प्रशिक्षित होने के बाद भेजा गया था। इसके बाद अन्य टाइगर रिजर्व से दो बाघों को भी पन्ना टाइगर रिजर्व भेजा गया था। माना जाता है कि वर्तमान में पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों का जो कुनबा आज यहां की शान बढ़ा रहा है, वह रिवाइल्डिंग सेंटर से भेजी गई बाघिन की बदौलत है।
मुख्य बाड़े के पास एक छोटा क्वारंटाइन हाउस (अलगाव गृह) भी निर्मित किया गया है। यह क्वारंटाइन हाउस तीन महीने से एक वर्ष तक की उम्र के बाघ शावकों को पालने के लिए बनाया गया है।