
नईदुनिया न्यूज, लांजी/बालाघाट। 27 और 28 जनवरी लांजी थाना क्षेत्र के घोटी व नंदोरा में आयोजित हिंदू सम्मेलन में उपजे विवाद के बाद गांव के लोगों ने यहां के दस मुस्लिम परिवारों से मिलना-जुलना, काम में न रखने या दुकान से सामग्री न लेने का फैसला लिया है। इसकी बकायदा कोटवार के माध्यम से गांव में मुनादी कराई गई है। इससे गांव में तनावपूर्ण माहौल है।
गांव के इस सामाजिक बहिष्कार के बाद मुस्लिम परिवारों के रोजगार पर असर पड़ रहा है। बहिष्कार के बाद स्कूल बस चलाने वाले आसिफ हुसैन को काम से निकाल दिया गया है। इलेक्ट्रिशियन सादिक हुसैन को भी काम नहीं मिल रहा है। किराना दुकान और मांस-मटन की दुकान चलाने वाले मुस्लिम दुकानदारों के पास से गांव वालों ने सामान लेना तक बंद कर दिया है।
पूर्व विधायक किशोर समरीते ने कहा कि एक सप्ताह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को संभालने का प्रयास नहीं किया गया है। मुस्लिम परिवारों का कहना है कि रोजगार के लिहाज से उन्हें कोरोना संक्रमण के वक्त लगे लॉकडाउन की कड़वी याद आ गई। बता दें कि घोटी व नंदोरा पिछले कुछ समय से गो हत्या और गो मांस से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं।

गौरतलब है कि जनवरी में घोटी नंदोरा में आयोजित सम्मेलन में मुस्लिम समुदाय ने आरोप लगाते हुए सम्मेलन स्थल पर विरोध किया था कि यहां पहुंचे साधु-संतों ने उनके खिलाफ बयान दिए थे। इसी बात को लेकर दो समुदाय के बीच नोकझोक हो गई थी। गांव वालों की शिकायत पर लांजी पुलिस ने दस लोगों पर एफआईआर भी दर्ज की थी। इसके बाद ग्रामीणों ने मुस्लिम परिवारों को बहिष्कृत कर दिया है।
लांजी के पूर्व विधायक समरीते ने मामले को चिंताजनक बताया है। उन्होंने इस सामाजिक बहिष्कार की केंद्रीय गृह मंत्रालय से जांच कराने और दोनों गांवों में पुलिस फ्लैग मार्च कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दस मुस्लिम परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आना अत्यंत चिंताजनक है।
आरोप लगाया कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद लांजी पुलिस, पुलिस मुख्यालय और राज्य स्तर के अधिकारी मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियां भी इस पर मौन साधे हुए है। सरपंच, सचिव, जनपद सदस्य और जिला पंचायत सदस्य भी इसके समर्थन में दिख रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में ‘हेट स्पीच’ दी जा रही है।