

योगेश कुमार गौतम, नईदुनिया, बालाघाट। बालाघाट के लिए 80वां स्वतंत्रा दिवस विशेष होगा। माओवाद के कलंक से मुक्त होने के बाद यह पहला स्वतंत्रता दिवस होगा, जिसमें आत्मसमर्पित माओवादी भी देश की आजादी के जश्न का हिस्सा बनेंगे। 15 अगस्त को होने वाले समाराेह में माओवादी भी शामिल होंगे। गुरुवार को बालाघाट पुलिस ने अनूठी पहल की।
आईजी, डीआईजी, एसपी सहित पुलिस अधिकारी माओवादी प्रभावित रहे गांव पहुंचे। उनके साथ वो 11 माओवादी भी साथ थे, जिन्होंने दिसंबर 2025 में हथियार त्यागकर मुख्य धारा में लौटने का निर्णय लिया था। कार्यक्रम में बालाघाट के तीनों माओवादी भी शामिल हुए। ग्राम राशिमेटा की संगीता को महाराष्ट्र पुलिस और संपत को छत्तीसगढ़ पुलिस की विशेष सुरक्षा में कार्यक्रम में शामिल कराया गया। जबकि, पालागोंदी का दीपक बालाघाट पुलिस के साथ प्रभावित गांवों में पहुंचा।
बालाघाट के इतिहास में पालागोंदी, हर्रानाला, कुंआगोंदी, कोद्दापार, चौरिया, मुंडा जैसे गांवों में पहली बार ध्वजाराेहण हुआ। एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया, दक्षिण बैहर के पाथरी पंचायत के चुक्काटोला में भी गुरुवार को पुलिस अधिकारियों ने ध्वजारोहण किया। चुक्काटोला वही गांव है, जिसे कभी 50 लाख के इनामी माओवादी मिलिंद तेलतुंबड़े ने गोद लिया था।
आइजी ललित शाक्यवार, डीआइजी विनीत जैन, एसपी आदित्य मिश्रा सहित अन्य पुलिस अधिकारी 11 सरेंडर माओवादियों के साथ ग्राम बोदलबहरा, पालागोंदी और हर्राटोला पहुंचे। यहां आइजी शाक्यवार ने ध्वजारोहण किया। बालाघाट पुलिस के विद्यांजलि अभियान के तहत संवारे गए इन गांवों के स्कूलों में अधिकारियों ने शिक्षण सामग्री भेंट कीं। इसके बाद सभी ने साथ में भोजन किया।
उन्होंने आत्मसमर्पण के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटना सही निर्णय रहा। उन्होंने सबके साथ ‘वंदे मातरम’, ‘भारत माता की जय’ के जयघोष लगाए। अब वह भी आम लोगों की तरह जीवन जिएंगे। आइजी शाक्यवार ने कहा कि माओवादी हिंसा से मुक्त होने के बाद पहली बार बालाघाट में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। ये दोहरी खुशी है।
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