
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। पिता की मौत के बाद मां का किसी ओर के साथ प्रेम संबंध बनाकर उससे मिलने पर बेटे को एतराज था और उसने अपनी मां को तीन से चार बार ऐसा नहीं करने के लिए समझाया भी था लेकिन न मां मान रही थी और न ही उसका प्रेमी, इससे आहत बेटे ने न सिर्फ प्रेमी की निर्मम हत्या करने की योजना बनाई बल्कि इसको अंजाम भी दिया और हत्या, आत्महत्या प्रतीत हो इसके लिए शव को करीब 500 मीटर दूर ले गया और तालाब में फेंक दिया।
पूरे मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि परतापुर निवासी सुरेन्द्र पिता अम्मूलाल मड़ाबी 45 वर्ष 18 मई की रात पंचायत मीटिंग में शामिल होने की बात कह कर घर से गया था लेकिन वह वापस नहीं पहुंचा, जिसकी गुमशुदगी की शिकायत भी पुलिस से की गई।
तलाशी के दौरान शव परतापुर तालाब में मिला। पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को विवेचना में लिया गया। पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर किसी प्राणघातक हथियार से पीछे के तरफ घाव होने पर मामले को संदिग्ध मानकर पुलिस ने विवेचना शुरू की।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मृतक के परिजनों से पूछताछ में पता चला था कि उसका कुछ परिवार जनों के साथ प्रापटी को लेकर विवाद था। जिस पर पुलिस एफएसएल टीम व डाग स्कवायड के साथ घटना स्थल पहुंची और कुछ साक्ष्य जैसे चाकू में खून, गोबर से कई स्थान को लिपना मिले।
जब तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए थे, यहां संदेह करने जैसा पुलिस को कुछ नहीं मिला। जिसके बाद पुलिस दूसरे एंगल मीटिंग के दौरान ही हलचल व गुजर रहे वाहनों पर पहुंची लेकिन यहां भी पुलिस को नहीं मिला।
लगातार जांच के बाद भी पुलिस के हाथों जब कुछ नहीं लगा तो पुलिस ने एक बार फिर से घटनास्थल से लेकर 500 मीटर के एरिया का स्केन किया और यहां पर खेत मार्ग पगडंडी में खून का धब्बा पुलिस के हाथ लगा, इसकी फारेंसिक जांच किए जाने पर ये खुन मानव का निकला जिसके बाद पुलिस इसी खून के धब्बे के सहारे आगे बढ़ी और करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर पुलिस को बहुत सारा खुन मिला। जिससे पुलिस इस अंधे हत्याकांड का खुलासा कर पाई।
पुलिस ने जब संदेह के आधार पर सोनू मड़ाबी से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसके पिता की करीब पांच से 6 साल पहले मौत हो चुकी है, मौत के कुछ समय बाद से ही मां व सुरेन्द्र के बीच प्रेम संबंध चलने लगा था और वह चुपके से रात के समय उसके घर आता था जिसकी जानकारी उसे लगने पर उसने मां को मना भी किया था।
नहीं मानने पर उसने सुरेन्द्र की हत्या करने का मन बना लिया था और 18 मई की रात वह अपने दोस्त मिथुन सैयाम के साथ मिलकर खेत में दो कुल्हाड़ी लेकर छुप गया था, जैसे ही रात के समय सुरेन्द्र पीछे के तरफ से उसके घर के तरफ आया दोनों ने पीछे से उसके सिर व पीठ पर कुल्हाड़ी से वार किया और उसके बाद उसकी निर्मम हत्या कर उसके शव को वहां से उठाकर तालाब में ले जाकर फेंक दिया था।
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