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नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। मंगलवार का दिन बालाघाट जिले के लिए बेहद खास रहा। महाकौशल के जबलपुर जिले के बाद बालाघाट ऐसा दूसरा जिला बन गया है, जहां घुटनों से जुड़ी सर्जरी इंसानी हाथ नहीं, बल्कि रोबोट करेंगे। इस एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वाली मशीन में चिकित्सक द्वारा संरक्षित निर्देशों के अनुसार, रोबोट मिसो रोबोटिक टेक्नोलॉजी की मदद से कठिन से कठिन सर्जरी करेगा। इस तकनीक से घुटना प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) की प्रक्रिया बेहद आसान और सुविधाजनक होगी।
मंगलवार को समाधान हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रम में रोबोटिक सर्जरी मशीन का उद्घाटन किया गया। समाधान हॉस्पिटल के संचालक व ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अजीत गनवीर और डॉ. श्रेय जैन की पहल पर शुरू की गई इस पहल से जिलेवासियों को दूसरे बड़े शहरों के चक्कर लगाने या महंगे इलाज से निजात मिलेगी।
सांसद भारती पारधी, आईएमए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. बीएम शरणागत, डॉ. दिनेश मेश्राम आदि ने फीता काटकर इसकी शुरुआत की। समारोह में पूर्व सिविल सर्जन डॉ. संजय धबड़गांव, डॉ. अमीशा जैन, डॉ. वेदप्रकाश लिल्हारे, डॉ. नीलिमा लिल्हारे, डॉ. तरुण विजयवार, दीनबंधु चौहान, दीपक रंगारे, अशोक जैन, चंद्रकांत पिपलेवार सहित अन्य मौजूद रहे।
सांसद ने कहा- बालाघाट को पहले पिछड़ा हुआ जिला समझा जाता था, लेकिन जिले के युवा चिकित्सकों ने साबित कर दिया कि बालाघाट में अपार संभावनाएं हैं। जिले में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत, नए अध्याय की शुरुआत है। नेतृत्व परिवर्तन के साथ देश ही नहीं, बालाघाट भी बदल रहा है।
बालाघाट के युवा चिकित्सक बड़े शहरों के बजाय अपने जिले में सेवाएं देने में रुचि दिखा रहे हैं। रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधा बड़े शहरों में ही संभव थी, लेकिन अब ये बालाघाट जिले में भी उपलब्ध है।
"इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. बीएम शरणागत ने कहा- इस तकनीक में डॉक्टर मशीन को ऑपरेशन से जुड़े निर्देश देते हैं और रोबोट उसी के अनुसार, सावधानी से पूरी प्रक्रिया करता है। रोबोटिक सर्जरी बेहद सुरक्षित और भरोसेमंद है। आने वाले वर्षों में ये तकनीक न सिर्फ ऑर्थोपेडिक बल्कि हर क्षेत्र में काम आएगी। डॉ. शरणागत ने रोबोटिक मशीन से 78 वर्षीय वृद्ध मरीज की सफल हार्ट सर्जरी का उदाहरण देकर इसकी विश्वसनीयता बताई।"
"डॉ. अजीत गनवीर ने कहा- आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जमाना है। हमें वक्त के साथ बदलना होगा। रोबोटिक सर्जरी बेहद सटीक और उच्च क्षमता वाली होती है। मरीज जल्द रिकवर होता है। इस तकनीक से मरीज को उन्नत इलाज मिलेगा। सिवनी, मंडला, छिंदवाड़ा जैसे जिलों में भी ये सुविधा नहीं है। रोबोटिक मशीन से सर्जरी की परिकल्पना करना, इसे अंतिम छोर पर बसे बालाघाट तक लाना, अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।"
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