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    संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक कहानी, MPPSC परीक्षा में पूरे प्रदेश में चौथा स्थान हासिल कर नरेंद्र ने रोशन किया बालाघाट का नाम

    MPPSC exam result: सपनों को साकार करने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े हौसलों और अटूट मेहनत की जरूरत होती है। बालाघाट जिले की मैंगनीज नगरी उक...और पढ़ें

    By Mahesh ChouhanEdited By: manoj dubey
    Publish Date: Mon, 15 Jun 2026 07:09:41 PM (IST)Updated Date: Mon, 15 Jun 2026 07:12:49 PM (IST)
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    संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक कहानी, MPPSC परीक्षा में पूरे प्रदेश में चौथा स्थान हासिल कर नरेंद्र ने रोशन किया बालाघाट का नाम
    मध्यप्रदेश सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में भूगोल विषय से पूरे प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त करने वाले नरेंद्र बघेल।

    HighLights

    1. मध्यप्रदेश सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में मिला चौथा स्थान
    2. बालाघाट से ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की
    3. उकवा के युवा नरेंद्र बघेल ने जिले का रोशन किया

    नईदुनिया प्रतिनिधि,बालाघाट। सपनों को साकार करने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े हौसलों और अटूट मेहनत की जरूरत होती है। बालाघाट जिले की मैंगनीज नगरी उकवा के युवा नरेंद्र बघेल ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। मध्यप्रदेश सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में भूगोल विषय से पूरे प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त कर उन्होंने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे बालाघाट जिले को गौरवान्वित किया है।

    नरेंद्र बघेल की सफलता संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक कहानी है। एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे नरेंद्र के पिता श्रवण बघेल वर्षों से माइंस में कार्यरत हैं और सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करते रहे हैं।

    बालाघाट से ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की

    आर्थिक चुनौतियों के बीच भी परिवार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और नरेंद्र ने भी अपने सपनों को परिस्थितियों की भेंट नहीं चढ़ने दिया। बचपन से ही मेधावी नरेंद्र ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय शासकीय विद्यालयों से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बालाघाट से उच्च शिक्षा हासिल की और बालाघाट से ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की।


    अध्ययन के दौरान इतिहास और भूगोल विषयों के प्रति उनकी विशेष रुचि विकसित हुई, जिसने उन्हें अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कभी नहीं मानी हार

    प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिन तैयारी, सीमित संसाधन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच नरेंद्र ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अनुशासित दिनचर्या, निरंतर अध्ययन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर पहले इतिहास विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) उत्तीर्ण की और बाद में भूगोल विषय में भी नेट परीक्षा में सफलता प्राप्त की।

    इसके बाद उन्होंने सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में भूगोल विषय से पूरे मध्यप्रदेश में चौथा स्थान अर्जित कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। नरेंद्र की यह उपलब्धि आज जिले के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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    उपलब्धि पर उकवा, बैहर और पूरे बालाघाट जिले में खुशी

    विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उकवा, बैहर और पूरे बालाघाट जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।

    सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा क्षेत्रवासियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।