
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। जिले में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग किए जाने का मामला सामने आया है। प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक रसूख के चलते खुद को कालोनाइजर बताने वाले लोग मनमाने तरीके से जमीनों की प्लाटिंग कर रहे हैं।
ताजा मामला जिला मुख्यालय से लगे वारासिवनी मार्ग स्थित ग्राम डोंगरिया का है, जहां सरकारी तालाब की जमीन पर अवैध प्लाटिंग किए जाने का आरोप लगा है। रविवार को ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
ग्रामीणों ने तत्कालीन पटवारी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही वारासिवनी एसडीएम कार्तिकेय जायसवाल मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सौ साल पुराने तालाब पर अतिक्रमण का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम डोंगरिया में लगभग 100 वर्ष पुराना और सात एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला सरकारी तालाब स्थित है। आरोप है कि इस तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर प्लाटिंग की जा रही है। तालाब के अस्तित्व पर खतरा मंडराने से क्षेत्र के जलस्तर पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
मिट्टी भरकर काटे जा रहे प्लाट
ग्रामीणों का आरोप है कि रसूखदार दीपचंद द्वारा तालाब की जमीन पर मिट्टी का भराव कराकर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। विवादित भूमि पर लगभग 95 प्रतिशत प्लाट बेचे जा चुके हैं। ग्रामीणों ने तत्कालीन पटवारी नीरज डोंगरे पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने किसी अन्य स्थान के पट्टे को इस सरकारी भूमि पर दर्शाकर कथित रूप से भू-माफियाओं की मदद की।
जल संकट की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि ऐतिहासिक तालाब पर हो रहे अतिक्रमण से क्षेत्र में भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। लंबे समय से शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीण रविवार को एकजुट होकर धरने पर बैठ गए और तालाब को बचाने की मांग उठाई।
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