

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। तीन जून 2026 की रात जब वारासिवनी की संचेती राइस मिल में 242 क्विंटल शासकीय चावल से भरे एक ट्रक को विभागीय अधिकारियों ने रंगेहाथ पकड़ा था, तब किसी को उम्मीद नहीं थी किये कार्रवाई बालाघाट ही नहीं, पूरे देश-प्रदेश में हड़कंप मचा देगी।
मप्र के चर्चित मामलों में बालाघाट का चावल हेराफेरी कांड भी जुड़ गया है। इस कांड को दो माह दो दिन हो चुके हैं। एथनाल उत्पादन के नाम पर हुई चावल चोरी से जुड़ा ये प्रकरण आज बालाघाट की जनता की जुबान पर है।
एसपी आदित्य मिश्रा की अगुवाई में बनी विशेष जांच दल (एसआइटी) की सघन जांच, मैराथन पूछताछ, संदिग्धों के बयानों के आधार पर कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए एसआइटी 17 आरोपितों तक पहुंच गई, जो सरकारी की एथनाल नीति की आड़ में गरीबों के हक पर डाका डाल रहे थे।
इनमें कई नामी चेहरे हैं, तो कई राजनीतिक रसूख वाले, लेकिन एसआइटी की तटस्थ, पारदर्शी और दोषियों पर हर हाल में एक्शन करने की मंशा ने चावल हेराफेरी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।
जांच में ये साबित हो चुका है कि बालाघाट एफसीआइ के गोदाम से निकला 5459 टन सरकारी चावल छिंदवाड़ा के एथनाल प्लांट पहुंचा ही नहीं है। ये चावल राइस मिलरों, ट्रांसपोर्टरों और एथनाल प्लांट के एजेंटों के षडयंत्र का शिकार हो गया।
चावल हेराफेरी में पूर्व मंत्री और वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे के अपनों की संलिप्तता ने इस मामले को और बहुचर्चित कर दिया।
कावरे के भतीजे अविनाश कावरे, भाई कुमार (राजकुमार) कावरे की हर्ष राइस इंडस्ट्री के साझेदार विनोद कुमार शर्मा और गोपाल सिंह ठाकुर की एक के बाद एक गिरफ्तारी ने पूर्व मंत्री की किरकिरी कर दी।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती गई, पूर्व मंत्री के करीबी कार्रवाई के दलदल में धंसते गए। कभी राजनीतिक रसूख रखने वाले ये चेहरे अब सलाखों के पीछे हैं।
एथनाल के नाम पर हुई चावल चोरी की तफ्तीश में जब एसआइटी को इसकी लिंक सीमा पार राज्यों में मिली, तो जांच का दायरा बढ़ गया। पूछताछ में उजागर हुए नामों से जब हेराफेरी से जुड़े सवाल पूछे गए, तो महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के खंडेलवाल बंधुओं के चेहरे भी बेनकाब हो गए।
एसआइटी ने राइस मिलर जुगलप्रसाद खंडेलवाल और उसके भाई किशनलाल खंडेलवाल को गिरफ्तार कर लिया। सिवनी का राइस मिल सोनू जैन नोएड से दबोचा गया। छिंदवाड़ा एथनाल प्लांट का एजेंट राहुल प्रताप और सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव भी एसआइटी के शिकंजे में आ गए।
चावल की अफरा-तफरी मचाने वालों पर एसआइटी की कार्रवाई से बालाघाट की जनता खुश है। लोगों के बीच यही चर्चा है कि गरीबों के हक पर डाका डालकर अपनी झोली भरने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, लेकिन चर्चा अब बड़े चहेरों पर एक्शन को लेकर भी हो रही है।
दरअसल, जिस हर्ष राइस इंडस्ट्री के तीन साझेदारों को एसआइटी ने गिरफ्तार किया है, उसी हर्ष राइस इंडस्ट्री में पूर्व मंत्री का भाई कुमार कावरे बड़ा साझेदार है, जिसकी अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कुमार कावरे पर एक्शन कब होगा?