नवदुनिया प्रतिनिधि, बैतूल। सतपुड़ा की वादियों के बीच बसे बैतूल जिले के हिल स्टेशन कुकरू को अब प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 27 एवं 28 जून को दो दिवसीय प्रवास पर कुकरू आ रहे हैं।
शनिवार शाम छह बजे मुख्यमंत्री कुकरू में बनाए हेलीपैड पहुंचेंगे और शाम 6:30 बजे सनसेट पाइंट का अवलोकन करेंगे। इसके बाद शाम 6:45 बजे ग्राम पंचायत कुकरू में आयोजित रात्रि चौपाल में शामिल होकर ग्रामीणों से सीधा संवाद करेंगे।
पौधारोपण और काफी प्लांटेशन का करेंगे अवलोकन
चौपाल में वे ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और विकास संबंधी अपेक्षाएं सुनेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे तथा रात्रि विश्राम कुकरू में ही करेंगे। 28 जून को मुख्यमंत्री प्रातः 6:30 बजे सनराइज एवं बुच प्वाइंट पर मेडिटेशन करेंगे। इसके बाद महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित गतिविधियों का अवलोकन करेंगे।
सुबह 7:30 बजे पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लेने के बाद वे कुकरू के ऐतिहासिक काफी प्लांटेशन का निरीक्षण करेंगे। सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे तथा 11 बजे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात के सामूहिक श्रवण में शामिल होंगे। दोपहर 12 बजे वे कुकरू रेस्ट हाउस से हेलीपैड के लिए रवाना होंगे और 12:10 बजे भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे।
पर्यटन विकास की योजनाओं पर रहेगी नजर
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कुकरू क्षेत्र में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विशेष फोकस रहने की संभावना है। होम स्टे, इको टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, काफी टूरिज्म और स्थानीय रोजगार सृजन से जुड़े विषयों पर चर्चा हो सकती है। साथ ही स्थानीय कृषि उत्पाद कोदो-कुटकी की ब्रांडिंग तथा क्षेत्र की पेयजल समस्या के समाधान को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है।
16 वर्ष पहले आए थे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
कुकरू अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए देश भर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र के कई गांव आज भी आर्थिक पिछड़ेपन और मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुकरू-खामला क्षेत्र का दौरा कर ग्रामीणों के आर्थिक उत्थान के लिए दुग्ध उत्पादन, वनोपज आधारित आजीविका और स्व-सहायता समितियों के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की योजना शुरू करने के निर्देश दिए थे।
कुकरू, लोकलदरी, घोगाल, भोड़ियाकुंड, कसई, बोथिया और बड़गांव जैसे गांवों में समितियां तो बनीं, लेकिन अधिकांश योजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं। ग्रामीण आज भी रोजगार और आजीविका के बेहतर अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मध्य भारत का अनोखा काफी हब है कुकरू
कुकरू-खामला क्षेत्र मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि मध्य भारत का एकमात्र प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। वर्ष 1944 में ब्रिटिश महिला फ्लोरेंस हैंड्रिक्स ने यहां लगभग 160 एकड़ क्षेत्र में काफी के बागान लगाए थे। वर्तमान में वन विभाग की देखरेख में यहां अरेबिका कॉफी का उत्पादन हो रहा है। राज्य सरकार ने कुकरू काफी सहित 38 उत्पादों को जीआई टैग दिलाने के लिए आवेदन भेजा है।
विशेषज्ञों की जांच में यहां की काफी बीन्स उच्च गुणवत्ता की पाई गई हैं और इन्हें भविष्य में निर्यात योग्य बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। कुछ विदेशी कंपनियों ने भी इस काफी बागान में रुचि दिखाई है।
अधिकारियों ने लिया तैयारियों का जायजा
मुख्यमंत्री के आगमन से पूर्व शुक्रवार को कमिश्नर श्रीकांत बनोठ, आईजी मिथलेश कुमार शुक्ल, डीआईजी वीरेंद्र कुमार सिंह, कलेक्टर डा. सौरभ संजय सोनवणे एवं पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने कुकरू पहुंचकर कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने हेलीपैड, रात्रि चौपाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मेडिटेशन स्थल, महिला स्व-सहायता समूह संवाद कार्यक्रम और मन की बात कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेकर आवश्यक निर्देश दिए।
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पर्यटन का केंद्र बनाने का प्रयास
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि कुकरू को पर्यटन के लिए विकसित करने की योजना बनाई गई है। कुकरू के समीप महाराष्ट्र के पर्यटक स्थल चिकलदरा, बैतूल के जैन तीर्थ मुक्तागिरी और कुकरू का एक सर्किट बनाया जाएगा। इसका केंद्र कुकरू रहेगा ताकि यहां पर पर्यटक आ सकें और क्षेत्र का विकास होने के साथ ही रोजगार के साधन भी बढ़ सकें।मुख्यमंत्री के द्वारा कुकरू को लेकर बड़ी घोषणा भी की जाएगी।