भिंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर दिलाया फायदा? कोर्ट सख्त, नायब तहसीलदार समेत 7 लोगों पर होगी FIR
भिंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर आरोपी को लाभ पहुंचाने के मामले में कोर्ट ने तत्कालीन नायब तहसीलदार समेत सात लोगों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दि...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 04:52:30 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 04:52:30 PM (IST)
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर एक व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई से बचाने की कोशिश। (नईदुनिया)HighLights
- कोर्ट ने सात आरोपितों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
- फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर आरोपी को कथित लाभ पहुंचाया गया।
- तत्कालीन नायब तहसीलदार, सचिव और पटवारी भी आरोपित हैं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। भिंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर एक व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई से बचाने के कथित मामले में न्यायालय ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) निधि नीलेश श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई के बाद तत्कालीन नायब तहसीलदार, सचिव, पटवारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित सात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
न्यायालय ने थाना सिटी कोतवाली को निर्देशित किया है कि आदेश का तत्काल पालन करते हुए प्रकरण दर्ज कर उसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। इस आदेश के बाद प्रशासनिक और राजस्व महकमे में हलचल तेज हो गई है।
परिवाद पर हुई सुनवाई
- यह मामला एडवोकेट गौरव शर्मा द्वारा दायर अपंजीकृत परिवाद के आधार पर न्यायालय पहुंचा था। परिवाद की सुनवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 75(3) के तहत की गई।
- शिकायत में आरोप लगाया गया कि सभी आरोपितों ने आपसी मिलीभगत से विमल यादव का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया, ताकि उसे कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके। न्यायालय ने प्रस्तुत दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करने के बाद प्रथम दृष्टया मामला दर्ज किए जाने योग्य माना।
इन सात लोगों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश
- न्यायालय ने तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, विमल यादव, आशुतोष सिंह यादव, सचिव शेरसिंह यादव, पटवारी संजीव शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन तथा राजकुमार दुबे के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
- आदेश के अनुसार सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 336(2), 336(3), 340(1) और 340(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया जाएगा।
सरकारी रिकॉर्ड और प्रक्रिया की होगी जांच
न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस पूरे मामले की विस्तृत विवेचना करेगी। जांच के दौरान जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया, सरकारी अभिलेखों की सत्यता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। पुलिस यह भी जांच करेगी कि कथित फर्जी दस्तावेज किन परिस्थितियों में तैयार हुए और इससे किसे लाभ पहुंचाया गया।
पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश
सीजेएम ने थाना प्रभारी सिटी कोतवाली को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन करते हुए एफआईआर दर्ज करें और उसकी अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस संबंधित दस्तावेजों, रिकॉर्ड और आरोपितों के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
परिवादी पक्ष ने कही यह बात
परिवादी के अधिवक्ता गौरव शर्मा ने कहा कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर एक आरोपित को अनुचित लाभ पहुंचाने की शिकायत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि निष्पक्ष पुलिस जांच से पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
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