नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए दो चरण की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। इस बार 1.22 लाख सीटों के लिए तीन चरणों की लाटरी के बाद करीब 1.17 लाख सीटें बच्चों को आवंटित कर दी गई है। इसमें से दो चरण में करीब एक लाख सीटों पर प्रवेश हुए हैं। बीते शुक्रवार को तीसरे चरण की लाटरी निकाली गई है।
इसमें 7,630 बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए हैं। जिन्हें 20 जुलाई तक प्रवेश लेना है। इसके बाद भी इस साल 15 हजार सीटें खाली रह जाएंगी। बता दें कि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से वंचित बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा दी जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश में सीटों की संख्या साल-दर-साल घट रही है। हालांकि इस साल 1.22 लाख सीटों के लिए 2.10 लाख आवेदन हुए थे, जिसमें से 1.78 लाख पात्र थे।
तीसरे चरण में खाली रह जाती हैं सीटें
दो चरण के बाद करीब 22 हजार सीटें खाली है। इसके लिए तीसरे चरण में सात हजार सीटें आवंटित की गई है। अगर सभी सात हजार विद्यार्थी प्रवेश ले लेते हैं, तो भी 15 हजार सीटें खाली रह जाएंगी। हालांकि तीसरे चरण में बच्चों को मनपसंद स्कूल आवंटित नहीं होते हैं। इस कारण प्रवेश कम ही होते हैं।
छह साल में प्रवेश भी कम हुए
वर्ष 2021-22 में आरटीई के तहत पात्र आवेदनों की संख्या 1,99,741 थी। इनमें से 1,29,690 को दाखिला मिला। करीब 70 हजार बच्चे प्रवेश नहीं ले पाए, लेकिन छह वर्षों में सीटें घटने से स्थिति और बिगड़ गई है। 2026-27 में आवेदनों की संख्या 2.10,422, जबकि 1.78 लाख आवेदन पात्र थे, जिनके लिए सीटें 1.22 लाख ही रही।
प्रवेश कम होने का यह कारण
बड़े निजी स्कूलों के लिए अभिभावक आवेदन करते हैं। कई बच्चों का बड़े स्कूलों का नाम आवंटित नहीं हो पाता है। जिन अभिभावकों के बच्चों को छोटे स्कूल आवंटित होते हैं, वे उन स्कूलों में प्रवेश नहीं कराते हैं। यही कारण है कि हर साल अधिक सीटें खाली रह जाती है। साथ ही बड़े स्कूलों में शिक्षण शुल्क के अलावा अन्य खर्च मिलाकर करीब 70 से 80 हजार रुपये का खर्च देना पड़ता है।
इस सत्र का आंकड़ा
आरटीई के तहत प्रदेश का आंकड़ा
- लाटरी में शामिल बच्चे-1,78,714
- सीटों की संख्या-1,22,551
- स्कूल का आवंटन-117,536
- अब तक कुल प्रवेश-100,526
- अब तक खाली सीटें-22,025
- तीसरे चरण में कुल आवंटित सीट-सात हजार
तीसरे चरण के बाद भी अगर सीटें खाली रहती है तो अगला चरण करने पर विचार किया जाएगा। - डॉ. अरुण सिंह, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र