प्रदेश में हर दिन 283 सड़क हादसे, 61% युवा बने शिकार; शादी और छुट्टियों के सीजन में बढ़े मामले
प्रदेश की 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के ताजा आंकड़ों से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच प्रदेश में कुल ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 11 Jun 2026 04:05:48 PM (IST)Updated Date: Thu, 11 Jun 2026 04:10:18 PM (IST)
प्रतीकात्मक फोटो। इंटरनेट मीडिया।HighLights
- प्रदेश में एक साल में 1.03 लाख से अधिक सड़क हादसे, औसतन 283 दुर्घटनाएं प्रतिदिन
- कुल हादसों में 61 प्रतिशत पीड़ित 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा
- सागर, इंदौर और भोपाल सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में शीर्ष जिलों में शामिल
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच प्रदेश में 1,03,294 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। यानी औसतन हर दिन 283 से अधिक लोग सड़क हादसों का शिकार हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्घटनाओं से प्रभावित लोगों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी युवाओं की है। 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 61 प्रतिशत युवा सड़क हादसों की चपेट में आए। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, बिना हेलमेट वाहन चलाना, स्टंटबाजी और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
युवा सबसे ज्यादा प्रभावित
आंकड़ों के अनुसार 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 24 प्रतिशत, 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 9 प्रतिशत, 0 से 15 वर्ष आयु वर्ग के 4 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक आयु के 3 प्रतिशत लोग सड़क हादसों का शिकार हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता की कमी और जोखिम उठाने की प्रवृत्ति दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है।
गर्मियों और शादियों के सीजन में बढ़े हादसे
रिपोर्ट में सामने आया है कि गर्मियों की छुट्टियों और विवाह सीजन के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। मई 2025 में 12,047 और जून 2025 में 9,626 सड़क हादसे रिकॉर्ड किए गए, जो वर्ष के सबसे अधिक प्रभावित महीने रहे।
सागर सबसे संवेदनशील जिला
जिलावार आंकड़ों में सागर सबसे अधिक दुर्घटनाओं वाला जिला रहा, जहां वर्षभर में 6,061 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इसके बाद इंदौर (4,853) दूसरे, भोपाल (4,546) तीसरे, छिंदवाड़ा (3,406) चौथे और जबलपुर (3,398) पांचवें स्थान पर रहे।
युवाओं में सड़कों पर रफ्तार का जूनून और यातायात नियमों के प्रति लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है। इसको लेकर युवाओं के बीच जागरूकता लाने की जरूरत है। गंभीर स्थिति में निजी वाहन का इंतजार करने के बजाय एंबुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि एंबुलेंस में मौजूद जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ रास्ते में ही मरीज की स्थिति को स्थिर रखने में मदद करते हैं।- तरुण सिंह परिहार, सीनियर मैनेजर, 108 एंबुलेंस सेवा, मप्र।