
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय करते हुए 50 साल पुराने पेंशन नियम में परिवर्तन कर दिया। अब चार लाख 60 हजार अंशदायी पेंशन योजना के दायरे में आने वाले कर्मचारी भी परिवार पेंशन के लिए पात्र होंगे, यानी कर्मचारी का निधन होने पर पत्नी और फिर आश्रितों को परिवार पेंशन मिलेगी। विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा और अविवाहित पुत्रियां भी आजीवन परिवार पेंशन की पात्र होंगी। इसके लिए अधिकतम 25 वर्ष की आयु सीमा भी समाप्त कर दी गई है। आश्रितों के लिए आय सीमा न्यूनतम पेंशन और महंगाई राहत मिलाकर निर्धारित होगी। आश्रित बड़ी संतान (बेटा हो या बेटी) को परिवार पेंशन की पात्रता होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में 1976 के पेंशन नियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बता दें कि 1976 में बने पेंशन नियम में भारत सरकार ने अब तक कई संशोधन किए हैं, जिन्हें प्रदेश में भी लागू करने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। मुख्य सचिव अनुराग जैन जब अपर मुख्य सचिव वित्त थे, तब इसे लेकर सहमति भी बनी, लेकिन प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई। अब अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी ने समिति बनाई, जिसकी अनुशंसाओं को कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। एक अप्रैल 2026 से इन्हें लागू करने का निर्णय लिया गया। इसका लाभ प्रदेश के सभी नियमित लगभग सात लाख कर्मचारियों को मिलेगा।
नियम में सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि एक जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारी भी परिवार पेंशन के दायरे में आएंगे। इन कर्मचारियों को प्रतिमाह 14 प्रतिशत अंशदान देना होता है। इतनी ही राशि राज्य सरकार भी मिलाती है। परिवार पेंशन का लाभ कर्मचारी के निधन के बाद पति/पत्नी व आश्रित को पेंशन की पात्रता होगी। परिवार पेंशन के लिए आश्रित की आय सीमा न्यूनतम पेंशन (7,750 रुपये) के साथ अब महंगाई राहत जोड़कर निर्धारित होगी। मानसिक रूप से दिव्यांग आश्रित को भी आजीवन परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा।
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पेंशन रोकने के मामले में निर्णय अब प्रशासकीय विभाग ही लेगा। जबकि, प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामले निर्णय के लिए कैबिनेट के समक्ष रखे जाएंगे। केंद्रीय सेवा से प्रदेश में सेवा देने के लिए आने वाले कर्मचारियों की पेंशन की गणना की प्रक्रिया में भी सुधार होगा। इसमें केंद्रीय सेवा की अवधि को भी जोड़ा जाएगा। पेंशनर्स एसोसिएशन ने नए नियम लागू करने के निर्णय का स्वागत किया है। इसके संरक्षक गणेश दत्त जोशी का कहना है कि 18 वर्ष के संघर्ष के सुखद परिणाम सामने आए हैं।
बैठक में 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की निरंतरता के लिए 7,133 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए लागू आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रुपये, एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703 करोड़, सांदीपनि विद्यालय के लिए 1,416 करोड़, आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ के साथ ही माध्यमिक शिक्षा मंडल को शुल्क की प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति जनजाति के अभ्यर्थियों को छात्रवृत्ति, कक्षा-नौवीं की छात्रवृत्ति के लिए 522 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना भी निरंतर रखी जाएगी।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत विद्युत अधोसंरचना विस्तार द्वारा 63 हजार 77 अविद्युतीकृत घरों एवं 650 अविद्युतीकृत शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण के लिए 366 करोड़ 72 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आइटी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी संवर्ग की प्रचलित और भावी भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए एक बार के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट दी गई है। अनारक्षित वर्ग के लिए यह 40 और सुरक्षित वर्ग के लिए 45 वर्ष रहेगी।
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