नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। एम्स भोपाल में फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने की तैयारियां अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। संस्थान में शनिवार को ‘लंग ट्रांसप्लांट–द रोड अहेड’ विषय पर आयोजित विशेष संगोष्ठी संपन्न हुई, जिसमें मुंबई और चेन्नई के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एम्स की टीम को इस जटिल सर्जरी की बारीकियों, मरीजों के चयन और ऑपरेशन के बाद की चुनौतियों से निपटने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
बुनियादी ढांचा पहले से तैयार
एम्स प्रशासन ने इस परियोजना के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा पहले ही विकसित कर लिया है। इसमें विशेष ऑपरेशन थिएटर, उन्नत प्रयोगशाला और संक्रमण मुक्त आइसोलेशन वार्ड शामिल हैं। डॉक्टरों की टीम को देश के अग्रणी संस्थानों में भेजकर प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है।
हृदय और किडनी के बाद नई उपलब्धि
एम्स भोपाल में अब तक 18 किडनी और तीन हृदय प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। इसके बाद अब फेफड़ा प्रत्यारोपण की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है, जिससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर उन्नत इलाज मिल सकेगा।
मरीजों को मिलेगा सस्ता इलाज
इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को दिल्ली या मुंबई के निजी अस्पतालों में लगने वाले 40 से 60 लाख रुपये के खर्च से राहत मिलेगी और उन्हें घर के पास ही सस्ता और बेहतर इलाज उपलब्ध होगा।
मरीज का सही चयन जरूरी
मुंबई से आए डॉ. अपार जिंदल ने बताया कि फेफड़ा प्रत्यारोपण में सर्जरी के साथ-साथ मरीज का सही चयन और सर्जरी से पहले की तैयारी बेहद जरूरी होती है। यह सुनिश्चित करना होता है कि मरीज का शरीर नए अंग को स्वीकार करने के लिए तैयार हो।
समय प्रबंधन बड़ी चुनौती
डॉ. ज्ञानेश ठक्कर ने कहा कि फेफड़ा प्रत्यारोपण अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसमें समय प्रबंधन अहम भूमिका निभाता है। डोनर से अंग निकालने से लेकर प्रत्यारोपण तक हर चरण में सटीक समन्वय जरूरी होता है।
सर्जरी के बाद भी अहम भूमिका
डॉ. शारदा नगोटी ने बताया कि प्रत्यारोपण के बाद अंग शरीर के साथ कैसे तालमेल बैठा रहा है, इसकी लगातार निगरानी जरूरी होती है। बायोप्सी के माध्यम से अंग अस्वीकृति के शुरुआती संकेत पहचाने जाते हैं।
एम्स ने तैयार किया विशेष प्रोटोकाल
एम्स भोपाल में पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अलकेश खुराना ने बताया कि संक्रमण के खतरे को देखते हुए विशेष प्रोटोकाल तैयार किया गया है। वहीं सीटीवीएस विभाग प्रमुख डॉ. योगेश निवाड़िया ने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण के अनुभव से टीम को आत्मविश्वास मिला है।