MP TET 2026: टीईटी के लिए आवेदन करने की तारीख बढ़ी; अब 18 सितंबर तक फॉर्म भर सकेंगे शिक्षक
सेवारत शिक्षकों के लिए पहली बार होने वाली टीईटी के आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई है। अब शिक्षक 18 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे।
Publish Date: Fri, 04 Sep 2026 04:56:32 PM (IST)Updated Date: Fri, 04 Sep 2026 04:56:32 PM (IST)
प्रतीकात्मक फोटो।HighLights
- टीईटी के आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई है
- अब शिक्षक 18 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे
- कम आवेदन आने के बाद तारीख बढ़ाने का फैसला
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। मध्यप्रदेश में पहली बार होने जा रही सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा(टीईटी) के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई है।
शिक्षक अब 18 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में संशोधन के लिए 20 सितंबर तक का समय रहेगा। इस संबंध में ईएसबी ने पोर्टल पर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
शुक्रवार को अंतिम तारीख थी। गुरुवार तक डेढ़ लाख में से सिर्फ ढाई हजार शिक्षकों ने आवेदन किया था। कम आवेदन आने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग और कर्मचारी चयन मंडल के बीच चर्चा के बाद तारीख बढ़ाने का फैसला लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो रही परीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में आदेश दिया था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने कर्मचारी चयन मंडल को परीक्षा कराने के लिए प्रस्ताव भेजा था।
इसके बाद मंडल ने पहले 21 अगस्त से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू आवेदन मांगे थे। अब आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 18 सितंबर कर दी गई है।
शिक्षकों को ऑफलाइन परीक्षा देने का विकल्प दिया गया
शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह से मुलाकात की। ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प देने की मांग की थी। संगठनों का कहना था कि कई शिक्षक कंप्यूटर चलाने में सहज नहीं हैं, इसलिए उनके लिए ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प होना चाहिए।
स्कूल शिक्षा विभाग और कर्मचारी चयन मंडल के बीच चर्चा के बाद ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प देने पर सहमति बन गई है। इससे कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं कर पाने वाले शिक्षक भी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
एक हजार रुपये परीक्षा फीस का विरोध
शिक्षक संगठनों ने टीईटी के लिए एक हजार रुपये शुल्क लिए जाने का भी विरोध किया है। शिक्षकों का तर्क है कि परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग करा रहा है, इसलिए इसका खर्च सरकार को उठाना चाहिए। परीक्षा शुल्क में शिक्षकों को राहत देने की मांग पर फिलहाल कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है।