• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

MP की ऐतिहासिक धरोहर... जानिए क्यों दुनिया भर के डाक टिकट संग्रहकर्ताओं की पहली पसंद हैं भोपाल के विंटेज टिकट

ब्रिटिश काल के दौरान जब देश की अधिकतर रियासतें अंग्रेजों की डाक व्यवस्था पर निर्भर थीं, तब भोपाल रियासत के पास अपना खुद का डाक टिकट छापने का दुर्लभ अध...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 07 Sep 2026 02:47:51 PM (IST)Updated Date: Mon, 07 Sep 2026 02:47:51 PM (IST)
MP की ऐतिहासिक धरोहर... जानिए क्यों दुनिया भर के डाक टिकट संग्रहकर्ताओं की पहली पसंद हैं भोपाल के विंटेज टिकट
भोपाल के विंटेज टिकट (ये तस्वीर एआई की मदद से बनाई गई है)

HighLights

  1. भोपाल रियासत के विंटेज डाक टिकट दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय
  2. लिथोग्राफी तकनीक से पत्थरों पर हाथ से छपते थे अनोखे टिकट
  3. प्रिंटिंग की गलतियों वाले दुर्लभ टिकट लंदन में लाखों में बिके

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक इतिहास न केवल अपनी वास्तुकला बल्कि अपनी अनूठी डाक प्रणाली के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ब्रिटिश काल के दौरान जब देश की अधिकतर रियासतें अंग्रेजों की डाक व्यवस्था पर निर्भर थीं, तब भोपाल रियासत के पास अपना खुद का डाक टिकट छापने का दुर्लभ अधिकार था। आज भोपाल रियासत के ये विंटेज डाक टिकट दुनिया भर के डाक टिकट संग्रहकर्ताओं (Philatelists) और इतिहासकारों के लिए एक अनमोल धरोहर बन चुके हैं।

लिथोग्राफी तकनीक से तैयार होते थे अनोखे टिकट

भोपाल में डाक व्यवस्था की शुरुआत साल 1847 में नवाब सिकंदर जहां बेगम के शासनकाल में हुई थी, जबकि पहला डाक टिकट 1872 में नवाब शाहजहां बेगम के दौर में जारी किया गया था। शुरुआती दिनों में ये डाक टिकट 'गवर्नमेंट सुल्तानिया प्रेस' में पत्थरों पर हाथ से लिथोग्राफी तकनीक द्वारा छापे जाते थे। हर टिकट की छपाई मैनुअल होने के कारण कोई भी दो टिकट एक जैसे नहीं दिखते थे, जो इन्हें संग्रहकर्ताओं के लिए बेहद खास और दुर्लभ बनाता है।


प्रिंटिंग की गलतियां बनीं बेशकीमती, अंतरराष्ट्रीय नीलामी में छाया भोपाल का इतिहास

इन विंटेज टिकटों की सबसे बड़ी खासियत इनकी छपाई में हुई वर्तनी (Spelling) की गलतियां हैं। 'NAWAB' की जगह 'NWAB' और 'BEGUM' की जगह 'BEGAN' लिखे हुए टिकटों को बाद में दुर्लभ किस्म मानकर सहेजा गया। भोपाल के इन ऐतिहासिक डाक टिकटों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश का मान बढ़ाया है। लंदन की प्रसिद्ध 'ग्रोसवेनर फिलैटेलिक ऑक्शंस' में इन गलत वर्तनी वाले टिकटों और शीट्स की नीलामी लाखों रुपये में हुई है।

इन टिकटों पर भोपाल रियासत का राजचिह्न 'दो मछलियां' अंकित होती थीं, जबकि 1936 से 1947 के बीच जारी टिकटों पर बाघ और चित्तीदार हिरण जैसे वन्यजीवों को जगह दी गई। भोपाल का यह अनोखा डाक इतिहास आज भी मध्य प्रदेश की समृद्ध विरासत के रूप में वैश्विक पटल पर चमक रहा है।

यह भी पढ़ें- दिल्ली बिल्डिंग हादसे में देवास के छात्र की मौत, कल सुबह ही पहुंचा था और दोपहर में गिर गई पीजी की बिल्डिंग