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    सरकारी विभागों में गाड़ियां लगवाने के लिए किराये पर ली कारें, जीपीएस बंद कर दूसरे राज्यों में बेचीं

    सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में वाहन अटैच करवाने का झांसा देकर ट्रैवल एजेंसियों और निजी वाहन मालिकों से किराए पर कार लेकर दूसरे राज्यों में ब...और पढ़ें

    By prashant vyasEdited By: Himadri Singh Hada
    Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 08:21:57 PM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 09:36:46 PM (IST)
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    सरकारी विभागों में गाड़ियां लगवाने के लिए किराये पर ली कारें, जीपीएस बंद कर दूसरे राज्यों में बेचीं
    सरकारी दफ्तर में कार लगवाने के लालच में ठगी। (AI से जेनरेट किया गया इमेज)

    HighLights

    1. सरकारी दफ्तर में कार लगवाने के लालच में ठगी
    2. भोपाल से सीहोर के दोराहा में रखी जाती थीं कारें
    3. मामले में अयोध्यानगर पुलिस ने नहीं की सुनवाई

    नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में वाहन अटैच करवाने का झांसा देकर ट्रैवल एजेंसियों और निजी वाहन मालिकों से किराए पर कार लेकर दूसरे राज्यों में बेचने वाले एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपित महंगे किराये का लालच देकर कारें लेते थे और फिर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को सस्ते दामों पर बेच देते थे।

    अरेरा हिल्स पुलिस ने गिरोह के मास्टर माइंड समेत छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। साथ ही करीब चार करोड़ रुपये कीमत की 36 कारें बरामद की जा चुकी हैं। पुलिस ने आरोपितों को तीन दिन की रिमांड पर लिया है, उनसे धोखाधड़ी पूर्वक बेची गईं अन्य कारों की पूछताछ की जा रही है।


    भोपाल से सीहोर के दोराहा में रखी जाती थीं कारें

    पुलिस के अनुसार अयोध्या बायपास स्थित रीगल ट्रेजर कॉलोनी निवासी 43 वर्षीय शैलेश जोशी ऑटो डीलिंग का काम करता है। वह पहले कार शोरूम और ट्रैवल एजेंसियों से जुड़ा रहा है, जिसके कारण उसकी इस क्षेत्र में अच्छी पहचान थी। इसी पहचान का फायदा उठाकर वह वाहन मालिकों और एजेंसियों को भरोसे में लेता था।

    शैलेश खुद को बीएचईएल और अन्य सरकारी विभागों से जुड़ा बताता था। वह दावा करता था कि उसकी पहुंच बड़े अधिकारियों तक है और वह वाहनों को सरकारी उपयोग के लिए अटैच कराकर आकर्षक किराया दिला सकता है। इसी भरोसे में आकर कई ट्रैवल एजेंसियों और निजी वाहन मालिकों ने अपनी कारें उसे सौंप दीं।

    भोपाल से सीहोर पहुंचती थीं कारें

    जांच में सामने आया है कि वाहन हासिल करने के बाद शैलेश उन्हें अपने साथियों के माध्यम से सीहोर जिले के दोराहा क्षेत्र पहुंचाता था। वहां गिरोह के सदस्य वाहिद अली, जयेंद्र जोशी, अरुण नाथ, राजा मीणा और रेहान खान सक्रिय भूमिका निभाते थे। कारें वहां पहुंचने के बाद सबसे पहले उनका जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम निष्क्रिय कर दिया जाता था, ताकि असली मालिक वाहन की लोकेशन ट्रेस न कर सके। इसके बाद वाहनों के संबंध में फर्जी अनुबंध और दस्तावेज तैयार कर खरीदारों की तलाश शुरू कर दी जाती थी।

    20 लाख की कार 10 लाख में

    गिरोह मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के खरीदारों और किसानों को निशाना बनाता था। 15 से 20 लाख रुपये कीमत वाली नई कारें 8 से 10 लाख रुपये में बेचने का लालच दिया जाता था। सस्ते सौदे के कारण अधिकांश खरीदार दस्तावेजों की गहन जांच नहीं करते थे।

    आरोपित खरीदारों से एक से दो लाख रुपये बयाना लेकर अनुबंध पत्र तैयार करते और भरोसा दिलाते कि एक-दो महीने में वाहन के दस्तावेज उनके नाम ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। इसी बहाने वाहन सौंप दिए जाते थे और बाद में संपर्क तोड़ लेते थे।

    लोकेशन बंद हुई तो खुला पूरा खेल

    मामले के फरियादी विदिशा निवासी गौरव कुशवाहा हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि शैलेश ने उनकी कार सरकारी विभाग में लगाने का भरोसा दिलाकर किराये पर ली थी। आठ जून को अचानक वाहन की लोकेशन बंद हो गई। संदेह होने पर वे अंतिम लोकेशन के आधार पर सीहोर के दोराहा पहुंचे, जहां उन्हें कई अन्य संदिग्ध वाहन दिखाई दिए। यहीं से बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा शुरू हुआ।

    मामले में अयोध्यानगर पुलिस ने नहीं की सुनवाई

    धोखाधड़ी की जानकारी तब और स्पष्ट हुई जब कई वाहन मालिकों को ट्रैवल एजेंसियों से किराया मिलना बंद हो गया। उन्होंने कोलार रोड स्थित ट्रैवल एजेंसी संचालक विश्वजीत गौर से संपर्क कर अपनी गाड़ियां वापस दिलाने की मांग की। लगातार दबाव के बावजूद शैलेश कोई जवाब नहीं दे रहा था। पीड़ितों ने इसकी शिकायत अयोध्यानगर पुलिस से भी की, लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की।

    आखिरकार विश्वजीत अपने साथियों के साथ शैलेश के घर पहुंचा और उसे पकड़कर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय ले गए। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर अरेराहिल्स थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। हालांकि पुलिस ने विश्वजीत को भी आरोपित बनाया है। फिलहाल वह फरार है।