
वैभव श्रीधर, नईदुनिया, भोपाल। देश के कई राज्यों और मध्य प्रदेश में लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस अब सत्ता में वापसी के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। संगठन सृजन अभियान के बाद अब पहली बार कांग्रेस पंचायत चुनाव में कार्यकर्ताओं को न केवल मैदान में उतारेगी, बल्कि उन्हें प्रत्यक्ष समर्थन भी देगी, ताकि स्पष्ट संदेश जाए कि पार्टी किसके साथ है।
प्रदेश में पंचायत चुनाव गैर दलीय आधार पर होते हैं। स्थानीय चुनाव होने के कारण राजनीतिक दल अब तक प्रत्यक्ष दखल से बचते रहे हैं। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद दल अपने समर्थकों की जीत का दावा करते रहे हैं। इस बार कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदल दी है।
नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में पूरी ताकत
वर्ष 2028 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर कांग्रेस नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में पूरी ताकत लगाने जा रही है। पार्टी का उद्देश्य ग्राम स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और संगठन को मजबूत करना है। प्रत्याशी चयन और समन्वय का काम पंचायत समितियों को सौंपा जाएगा। प्रदेश में 21,478 पंचायत समितियां गठित हो चुकी हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि संगठन के सशक्तीकरण के लिए लगातार काम किया जा रहा है। पंचायत चुनाव में कार्यकर्ताओं को सरपंच से लेकर जिला और जनपद पंचायत सदस्य तक का चुनाव लड़ाया जाएगा। पहली बार पार्टी बाकायदा समर्थन भी घोषित करेगी।
भाजपा भी बूथ स्तर पर सक्रिय
उधर भाजपा भी वर्ष 2027 से शुरू होने वाले चुनावों की तैयारी में जुट गई है। पार्टी प्रत्याशी अधिकृत नहीं करेगी, लेकिन समन्वय बनाने पर जोर रहेगा। भाजपा प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि ग्राम स्तरीय चुनाव में दलीय राजनीति न हो, इसलिए प्रत्याशी घोषित नहीं किए जाते। हालांकि जिला और जनपद पंचायत चुनाव में समन्वय बनाने का प्रयास रहता है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस चुनाव से पहले बड़े दावे करती है, लेकिन पिछले नगरीय निकाय चुनावों में कई जगह उसे प्रत्याशी तक नहीं मिले थे।
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