लैपटॉप में बार-बार खराबी पर भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग आयोग सख्त, कंपनी को 1.16 लाख लौटाने का आदेश
उपभोक्ता आयोग क्रमांक-1 ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उपभोक्ता को राहत देते हुए 1.16 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 11 May 2026 08:12:12 PM (IST)Updated Date: Mon, 11 May 2026 08:12:12 PM (IST)
उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को रिफंड के दिए आदेश नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग क्रमांक-1 ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उपभोक्ता को राहत देते हुए 1.16 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि वारंटी अवधि के दौरान लैपटॉप में लगातार खराबी आने के बावजूद कंपनी समस्या का समाधान नहीं कर सकी और उपभोक्ता को मानसिक रूप से परेशान किया गया।
अशोका गार्डन निवासी लक्ष्य गंगलानी ने 25 मई 2022 को 1.08 लाख रुपये में एचपी कंपनी का लैपटॉप खरीदा था। कंपनी की ओर से एक वर्ष की वारंटी दी गई थी। इसके अलावा उपभोक्ता ने अतिरिक्त भुगतान कर दो वर्ष की एक्सटेंडेड वारंटी भी ली थी।
खरीदने के बाद ही आने लगी तकनीकी खराबी
लैपटॉप खरीदने के कुछ माह बाद ही उसमें तकनीकी खराबियां आने लगीं। लैपटॉप बार-बार हैंग होने लगा और अत्यधिक गर्म होने की समस्या सामने आई। शिकायत के बाद सर्विस सेंटर ने मदरबोर्ड बदलकर विंडोज दोबारा इंस्टॉल किया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
लगातार परेशान होने के बाद लक्ष्य गंगलानी ने दिसंबर 2025 में परफेक्ट वर्ल्ड कंप्यूटर्स और एचपी इंडिया सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग क्रमांक-1 में परिवाद दायर किया।
लैपटॉप की पूरी कीमत लौटाई
मामले में आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय की बेंच ने इसे सेवा में कमी माना। आयोग ने आदेश दिया कि उपभोक्ता को लैपटॉप की पूरी कीमत 1.08 लाख रुपये लौटाई जाए। साथ ही मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के लिए 8 हजार रुपये हर्जाना भी दिया जाए।
रिफंड का आश्वासन, लेकिन नहीं मिली राहत
उपभोक्ता का आरोप था कि कंपनी और सर्विस सेंटर ने सुधार नहीं होने पर पूरी राशि लौटाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में न तो लैपटॉप ठीक किया गया और न ही रिफंड दिया गया।
वहीं सर्विस सेंटर की ओर से तर्क दिया गया कि उपभोक्ता लैपटॉप को अधिक समय तक चार्ज करता था, जिससे वह गर्म होकर खराब होने लगा। आयोग ने कहा कि वारंटी अवधि में लैपटॉप को सुधार कर देना कंपनी की जिम्मेदारी थी।
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