
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। साइबर ठगी के एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि उपभोक्ता द्वारा समय पर सूचना देने के बावजूद बैंक ने खाते से निकाली गई पूरी राशि वापस नहीं की, जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को शेष 47,700 रुपये लौटाने के साथ 15 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं। इस तरह बैंक को दो माह के भीतर कुल 62,700 रुपये का भुगतान करना होगा।
जिला उपभोक्ता आयोग क्रमांक-2 के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल तथा सदस्य अंजुम फिरोज और प्रीति मुद्गल की पीठ ने यह फैसला सुनाया। आयोग ने अपने आदेश में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के जीरो लायबिलिटी नियम का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई उपभोक्ता अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन की सूचना तीन दिन के भीतर बैंक को देता है, तो उसकी जीरो लायबिलिटी होती है। ऐसे मामलों में पूरी राशि लौटाना बैंक की जिम्मेदारी है।
आयोग ने पाया कि इस मामले में उपभोक्ता ने घटना के एक घंटे के भीतर बैंक और साइबर सेल दोनों को सूचना दे दी थी। इसके बावजूद बैंक ने पूरी राशि वापस नहीं की, इसलिए उसे शेष राशि और क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा।
ऐसे हुई थी साइबर ठगी
रोहित नगर निवासी वायएम पांडे ने सितंबर 2024 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था। शिकायत के अनुसार उन्हें बिजली विभाग का कर्मचारी बनकर कॉल किया गया और बिजली बिल बकाया बताकर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई। इसके बाद उन्हें एक लिंक भेजकर एनीडेस्क ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया।
अगले दिन भीम एसबीआई पे पर यूपीआई पिन सेट होने का संदेश मिला। उसी शाम उनके खाते से चार-पांच ट्रांजेक्शन के जरिए 97,700 रुपये निकाल लिए गए। उन्होंने तत्काल बैंक हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर एटीएम और यूपीआई ब्लॉक कराया तथा अगले दिन साइबर क्राइम में भी शिकायत की। बैंक ने केवल 49 हजार रुपये लौटाए, जबकि शेष 47,700 रुपये देने से इन्कार कर दिया।
बैंक ने उपभोक्ता को ठहराया जिम्मेदार
बैंक ने आयोग में दलील दी कि यूपीआई भुगतान बिना पिन के संभव नहीं है और उपभोक्ता ने स्वयं एनीडेस्क के माध्यम से गोपनीय जानकारी साझा की, जिससे धोखाधड़ी हुई। बैंक का यह भी कहना था कि शिकायत संबंधी ईमेल स्पष्ट नहीं था और अपंजीकृत ईमेल से भेजे जाने के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश
हालांकि आयोग ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि समय पर सूचना मिलने के बावजूद पूरी राशि वापस नहीं करना बैंक की सेवा में गंभीर कमी है। इसी आधार पर बैंक को शेष राशि और क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश दिया गया।
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