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MP से मानसून की विदाई की उल्टी गिनती शुरू, ग्वालियर-उज्जैन के रास्ते 5 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से होगा रवाना

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अनुकूल परिस्थितियां बनने से अगले एक से दो दिनों के भीतर यह रेखा प्रदेश में प्रवेश करेगी और ग्वालियर व उज्जैन संभाग से मा...और पढ़ें

By PANKAJ SHRIVASTAVAEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 11:35:42 AM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 11:35:42 AM (IST)
MP से मानसून की विदाई की उल्टी गिनती शुरू, ग्वालियर-उज्जैन के रास्ते 5 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से होगा रवाना
ग्वालियर व उज्जैन संभाग से शुरू होगी मानसून की विदाई

HighLights

  1. प्रदेश की दहलीज पर मानसून की वापसी रेखा, अक्टूबर से शुरू होगी गुलाबी ठंड
  2. अगले एक-दो दिन में ग्वालियर व उज्जैन संभाग से शुरू होगी विदाई
  3. पांच अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से हटेगा मानसून

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में नौ दिन की देरी से डिंडोरी और बालाघाट के रास्ते दाखिल हुआ दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश की दहलीज पर खड़ा हुआ है। राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर कई दिनों से ठिठकी मानसून की वापसी रेखा अटकी हुई है। वर्तमान में यह रेखा श्योपुर, मुरैना और नीमच के बार्डर को छू रही है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अनुकूल परिस्थितियां बनने से अगले एक से दो दिनों के भीतर यह रेखा प्रदेश में प्रवेश करेगी और ग्वालियर व उज्जैन संभाग से मानसून पीछे हटना शुरू हो जाएगा।

अनुमान है कि पांच अक्टूबर तक मानसून पूरे प्रदेश से पूरी तरह विदा हो जाएगा। मानसून के इस चार महीने के सीजन में 1 जून से 30 सितंबर तक पूरे प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो 949.5 मिलीमीटर के सामान्य कोटे से चार प्रतिशत कम है।


पूर्वी इलाकों में मेहरबान रहे

बादल प्रदेश के पूर्वी इलाकों में बादल मेहरबान रहे। यहां 1083.8 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य 1043.4 मिलीमीटर से चार प्रतिशत अधिक है। विंध्य और बुंदेलखंड के जिलों में जोरदार पानी गिरा। पश्चिमी में मानसूनी फुहारें काफी कमजोर रही।

इस हिस्से में 877.3 मिलीमीटर के सामान्य कोटे के मुकाबले महज 773.6 मिलीमीटर वर्षा हुई, यानी सीधे 12 प्रतिशत का घाटा दर्ज किया गया। मालवा-निमाड़ और मध्य नर्मदा घाटी के जिलों में इस बार सूखे जैसी स्थिति देखने को मिली।

मऊगंज में सबसे ज्यादा तो आलीराजपुर में सबसे कम वर्षा

प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा मऊगंज जिले में 1506 मिलीमीटर जो सामान्य से 54 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई, जबकि प्रतिशत के मामले में निवाड़ी जिला 59 प्रतिशत अधिक वर्षा के साथ अव्वल रहा। वहीं सबसे बदतर स्थिति आलीराजपुर की रही, जहां सामान्य से 51 प्रतिशत कम महज 426 मिलीमीटर पानी ही गिर सका। धार, झाबुआ, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल में भी 30 से 40 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई।

अक्टूबर में शुरू होगी गुलाबी ठंड, दिन में बढ़ेगी गर्मी

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अक्टूबर माह के दौरान मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। इसके साथ ही मानसून पश्चात अक्टूबर से दिसंबर की पूरी अवधि में भी राज्य में कम वर्षा का संकेत दिया गया है। केंद्र के अनुसार दिन के अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री तक पहुंचें, वहीं रात का पारा 19 से 20 डिग्री तक रहेगा। इसके चलते अक्टूबर में सामान्य से अधिक गर्मी व उमस का अहसास रहेगा और रात में गुलाबी ठंड का अहसास होगा।

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प्रदेश के चार बड़े शहरों का रिपोर्ट कार्ड

भोपाल: 1047.3 मिलीमीटर 10 प्रतिशत सामान्य से अधिक

ग्वालियर: 758.7 मिलीमीटर 5 प्रतिशत सामान्य से अधिक

जबलपुर: 997.6 मिलीमीटर 12 प्रतिशत सामान्य से कम

इंदौर: 633.1 मिलीमीटर 27 प्रतिशत सामान्य से कम

सीजन का लेखा-जोखा-

सर्वाधिक वर्षा वाले जिले

शहर -- प्रतिशत -- वर्षा मिलीमीटर में

मऊगंज -- 54 -- 1506.0

सतना -- 52 -- 1431.0

उमरिया -- 21 -- 1302.6

निवाड़ी -- 59 -- 1230.3

शहडोल -- 22 -- 1213.4

कम वर्षा वाले जिले

शहर -- प्रतिशत -- वर्षा मिलीमीटर में

आलीराजपुर -- 51 -- 426.0

धार -- 40 -- 492.9

झाबुआ -- 35 -- 576.4

रतलाम -- 35 -- 598.3

पांढुर्णा -- 23 -- 623.5

इनका कहना है

अगले एक-दो दिन में मानसून वापसी रेखा प्रदेश में दाखिल होगी। इसके लिए परिस्थितियां अनुकल बनी हुई है, जो पांच अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से बाहर हो जाएगी। मानसून के इस सीजन में एक जून से लेकर 30 सितंबर तक पूरे प्रदेश में चार प्रतिशत वर्षा कम हुई है। पूर्वी इलाकों में चार प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। पश्चिमी इलाकों में 12 प्रतिशत कम वर्षा हुई। प्रमेंद्र कुमार, मौसम विज्ञानी।