
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक तात्या टोपे की लोग अब थ्रीडी प्रतिकृति भी देख सकेंगे। मप्र पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार ने इसे तैयार कराया है। ऐसी 10 प्रतिकृति तैयार कराई गई हैं, जिनमें एक दो फीट की और बाकी छह इंच की हैं। इन्हें भोपाल स्थित वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान में रखा जाएगा। जिससे, विद्यार्थी, शोधार्थी देख सकेंगे। संभवत देश में पहली बार उनकी ऐसी प्रतिकृति (रिप्लिका) तैयार कराई गई है।
विभाग के आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों का संग्रहण, संरक्षण और शोध किया गया है। इसमें तात्या टोपे से जुड़ी लगभग सौ पांडुलिपियां मिली हैं। सबसे महत्वपूर्ण उनका पत्र है जिसमें उन्होंने क्रांति के बारे में स्थानीय राजाओं को संबोधित करते है कहा कि वे लोग जो निर्णय लेंगे वह उन्हें (तात्या टोपे) को भी मंजूर होगा। तात्या टोपे का हस्ताक्षर भी देखने को मिला है। ये दस्तावेज भी आमजन को देखने-पढ़ने के लिए संग्रहालयों या डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके माध्यम से स्कूल, जनजातीय शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थियों को थ्रीडी डिजाइन, डिजिटल स्क्रिप्टिंग, माडलिंग, आधुनिक सामग्री, प्रतिकृति निर्माण और नई निर्माण तकनीकों का अध्ययन कराया जा सकेगा। विद्यार्थी इतिहास को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय तकनीक के माध्यम से समझ सकेंगे। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और उनकी विरासत से उनका जुड़ाव भी मजबूत होगा।
तात्या टोपे की अधिकृत छोटी प्रतिकृतियां स्मारिका के रूप में नागरिकों के लिए उपलब्ध कराने की योजना है। इन्हें ई-कामर्स और ओएनडीसी जैसे डिजिटल मंचों के माध्यम से भी बेचा जा सकेगा। इस तरह प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत संग्रहालयों तक सीमित न रहकर आम लोगों तक भी पहुंच सकेगी। यह पहल विरासत संरक्षण, संग्रहालय शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी नवाचार को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।
नई शिक्षा नीति के अंतर्गत वाकणकर शोध संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग से भी संबंध किया जा रहा है। इसे महत्वपूर्ण बनाने के लिए यह प्रतिकृति तैयार कराई गई है। प्रयास है कि इसे स्मारिका के रूप में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाए। यह भी कोशिश है कि उनसे जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री जैसे पत्र हस्ताक्षर आदि को संग्रहालयों के माध्यम से या डिजिटल रूप में आमजन तक पहुंचाया जा सके। डा. मनीषा शर्मा संयुक्त संचालक, पुरातत्व संचालनालय एवं अखिलेखागार।