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साइबर ठगी होने पर बैंक को देने होंगे रुपये, उपभोक्ता आयोग ने 62,700 रुपये लौटाने को कहा

साइबर ठगी मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने एसबीआई को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए उपभोक्ता को 47,700 रुपये और 15,000 रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश द...और पढ़ें

By Anjali raiEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 08:20:17 AM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 08:20:17 AM (IST)
साइबर ठगी होने पर बैंक को देने होंगे रुपये, उपभोक्ता आयोग ने 62,700 रुपये लौटाने को कहा
साइबर ठगी होने पर बैंक को देने होंगे रुपये। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. साइबर ठगी मामले में उपभोक्ता आयोग ने बैंक को दोषी माना।
  2. बैंक को 47,700 रुपये और क्षतिपूर्ति लौटाने का आदेश मिला।
  3. उपभोक्ता ने एक घंटे में बैंक और साइबर सेल को सूचना।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। साइबर ठगी के एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि उपभोक्ता के समय पर सूचना दिए जाने के बाद भी बैंक ने उसके खाते से निकाली गई पूरी राशि वापस नहीं की, जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।

आयोग ने बैंक को शेष 47,700 रुपये लौटाने के साथ 15 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं। इस तरह बैंक को दो माह के भीतर 62,700 रुपये का भुगतान करना होगा। जिला उपभोक्ता आयोग क्रमांक-2 के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल तथा सदस्य अंजुम फिरोज और प्रीति मुद्गल की बेंच ने यह फैसला सुनाया।


आरबीआई के सर्कुलर का दिया हवाला

  • आयोग ने अपने आदेश में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई उपभोक्ता अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन की सूचना तीन दिन के भीतर बैंक को दे देता है, तो उसकी जीरो लायबिलिटी होती है।
  • ऐसे मामलों में बैंक की जिम्मेदारी होती है कि वह पूरी राशि उपभोक्ता को वापस करें। इस मामले में उपभोक्ता ने घटना के एक घंटे के भीतर बैंक और साइबर सेल दोनों को सूचना दे दी थी, इसलिए बैंक पूरी राशि लौटाने के लिए बाध्य था।

ऐसे हुई थी साइबर ठगी

  • रोहित नगर निवासी वायएम पांडे ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में सितंबर 2024 में परिवाद दायर किया था। शिकायत थी कि उन्हें बिजली विभाग का कर्मचारी बनकर कॉल किया गया और बिजली बिल बकाया बताते हुए कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई।
  • इसके बाद उन्हें एक लिंक भेजकर एनी डेस्क एप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। अगले दिन भीम एसबीआई पे पर यूपीआई पिन सेट होने का संदेश मिला, लेकिन बैंक शाखा बंद होने के कारण तत्काल संपर्क नहीं हो सका। उसी शाम उनके खाते से चार-पांच ट्रांजेक्शन में 97,700 रुपये निकाल लिए गए।
  • उन्होंने तुरंत बैंक हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर एटीएम और यूपीआई ब्लाक कराया और अगले दिन साइबर क्राइम में भी शिकायत की। बैंक ने केवल 49 हजार रुपये लौटाए, जबकि 47,700 रुपये देने से इन्कार कर दिया।

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बैंक ने लापरवाही का ठहराया जिम्मेदार

  • बैंक ने आयोग में दलील दी कि यूपीआई भुगतान बिना पिन के संभव नहीं है और उपभोक्ता ने स्वयं एनी डेस्क के माध्यम से गोपनीय जानकारी साझा की, जिससे धोखाधड़ी हुई। बैंक ने यह भी कहा कि शिकायत संबंधी ईमेल स्पष्ट नहीं था और अपंजीकृत ईमेल से भेजे जाने के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
  • हालांकि आयोग ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट कहा कि समय पर सूचना मिलने के बाद भी पूरी राशि वापस नहीं करना बैंक की सेवा में गंभीर कमी है। इसी आधार पर आयोग ने बैंक को शेष राशि और क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश दिया।