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कड़े कानून के बाद भी एमपी में तीन गुना बढ़े 'लव जिहाद' के मामले, 2025 में रिकॉर्ड 175 केस, सात को ही हुई सजा, 50 छूटे

लव जिहाद के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार के कड़े कानून के बाद भी साल 2025 में अन्य वर्षों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक मामले सामने आए। वर्ष 2021 में सरक...और पढ़ें

By shashikant TiwariEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 22 May 2026 09:30:17 AM (IST)Updated Date: Fri, 22 May 2026 09:30:17 AM (IST)
कड़े कानून के बाद भी एमपी में तीन गुना बढ़े 'लव जिहाद' के मामले, 2025 में रिकॉर्ड 175 केस, सात को ही हुई सजा, 50 छूटे
एमपी में तीन गुना बढ़े 'लव जिहाद' के मामले

HighLights

  1. लव जिहाद में संगठित नेटवर्क का असर, लगातार बढ़ रहे मामले
  2. कानून प्रभावी होने के बाद सर्वाधिक 175 मामले 2025 में आए
  3. पांच वर्ष में मतांतरण के 90 मामले, इनमें सर्वाधिक 40 बीते वर्ष में आए

शशिकांत तिवारी, नईदुनिया, भोपाल। लव जिहाद के विरुद्ध सरकार के कड़े कानून के बाद भी वर्ष 2025 में अन्य वर्षों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक मामले सामने आए। वर्ष 2021 में सरकार ने मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू किया था। इसके बाद वर्ष 2024 तक प्रतिवर्ष 40 से 65 के बीच मामले सामने आए थे। वर्ष 2025 में इस कानून के अंतर्गत 175 प्रकरण कायम किए गए।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले बढ़ने की दो वजह हैं। एक तो यह कि पिछले वर्ष प्रदेश में जो मामले सामने आए उनके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। दूसरा, पीड़िताओं ने अपराध दर्ज कराने की हिम्मत दिखाई। इसके अतिरिक्त मतांतरण के 90 मामले 2021 के बाद से सामने आए हैं, जिनमें सर्वाधिक 40 मामले वर्ष 2025 के हैं।


बता दें कि इस कानून में विवाह या किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए मतांतरण के मामले में अधिकतम 10 वर्ष की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रविधान है।

लव जिहाद को लेकर वर्ष 2025 सबसे अधिक चर्चा में भी रहा। भोपाल और इंदौर में इसके संगठित नेटवर्क सामने आए थे। भोपाल में सबसे पहले एक निजी कॉलेज की लड़कियों को मुस्लिम युवकों ने प्रेम जाल में फंसाया और दुष्कर्म किया। ब्लैकमेल भी किया। एक के बाद एक ऐसे पांच मामले सामने आए, जिनमें पीड़िताओं ने प्रकरण कायम कराया। इसी तरह से इंदौर में भी लव जिहाद का संगठित मामला सामने आया था। हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर मतांतरण कराने के आरोपितों को तीन लाख रुपये देने के आरोप में पुलिस ने इंदौर के कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को गिरफ्तार किया था।

इंदौर और भोपाल तो उदाहरण हैं, अन्य जिलों में भी आरोपितों का इसी तरह से संगठित नेटवर्क हो सकता है। प्रदेश में वर्ष 2021 से अभी तक इस अधिनियम के अंतर्गत (लव जिहाद और मतांतरण मिलाकर) 425 मामले सामने आ चुके हैं। इस वर्ष मार्च तक मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के अतंर्गत 35 एफआइआर पंजीबद्ध की जा चुकी हैं।

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सात को ही हुई सजा, 50 छूटे

बड़ी बात यह कि इस कानून की अंतर्गत आरोपितों को सजा की दर बहुत कम रही है। अब तक न्यायालयों से 57 मामलों में निर्णय आया है, जिनमें 50 में आरोपित बरी हो गए हैं। मात्र सात को सजा हुई है। लगभग 150 मामले अभी भी न्यायालयों में विचाराधीन हैं। वर्ष 2021 के पांच और 2023 के दो अपराधों में आरोपितों को सजा हुई है।