जनगणना ड्यूटी से बचने के लिए महिला शिक्षकों ने खोला बहानों का पिटारा, प्रशासन बोला- 'तर्क नहीं चलेगा'
बीते एक सप्ताह से निगम कमिश्नर के कार्यालय में हर दिन किसी न किसी महिला टीचर का आवेदन आ रहा है और तरह-तरह के बहाने बनाकर जनगणना ड्यूटी से नाम कटवाने क ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 15 Apr 2026 07:51:12 PM (IST)Updated Date: Wed, 15 Apr 2026 07:51:11 PM (IST)
Census in MP: ये तस्वीर एआई से बनाई गई है।नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। डिजिटल जनगणना की तैयारियों के बीच नगर निगम कार्यालय इन दिनों एक अलग ही स्थिति का सामना कर रहा है। यहां रोजाना महिला शिक्षकों के आवेदन पहुंच रहे हैं, जिनमें वे अलग-अलग कारण बताकर जनगणना ड्यूटी से नाम हटाने की मांग कर रही हैं।
इनमें कोई स्वास्थ्य समस्या का हवाला दे रहा है तो कोई पारिवारिक जिम्मेदारियों का। राजधानी में जनगणना का काम नगर निगम को सौंपा गया है। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी भी निगम के हैंडओवर है। बीते एक सप्ताह से निगम कमिश्नर के कार्यालय में हर दिन किसी न किसी महिला टीचर का आवेदन आ रहा है और तरह-तरह के बहाने बनाकर जनगणना ड्यूटी से नाम कटवाने का प्रयास कर रही हैं।
घरेलू कामकाज और व्यक्तिगत दलीलों का सहारा
एक शिक्षिका ने यह तक कहा कि वह घर में अकेली रहती हैं और उन्हें ही पूरे घर का काम संभालना पड़ता है, इसलिए ड्यूटी करना संभव नहीं है। सिर्फ व्यक्तिगत आवेदन ही नहीं, बल्कि कई मामलों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सिफारिश के साथ भी आवेदन भेजे जा रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि फील्ड ड्यूटी से बचने के लिए ये तर्क अब काम नहीं आएंगे।
केस-एक: बीमारियों और मेडिकल सर्टिफिकेट्स का बहाना
डिजिटल जनगणना से बचने के लिए महिला शिक्षकों ने बीमारियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। किसी को धूप से एलर्जी है तो किसी को पेट का ऐसा पुराना दर्द है, जिसका इलाज कराने बार-बार गुजरात जाना पड़ता है। मेडिकल सर्टिफिकेट्स और बीमारी के आवेदनों की बाढ़ आ गई है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि फील्ड ड्यूटी से बचने के लिए ये तर्क अब काम नहीं आएंगे।
केस-दो: बच्चों और पारिवारिक जिम्मेदारियों की ढाल
शिक्षकों द्वारा घरेलू जिम्मेदारियों को भी ढाल बनाया जा रहा है। कई शिक्षिकाओं का तर्क है कि वे घर में अकेली हैं और जनगणना पर जाने से घर के काम और बच्चों की देखभाल प्रभावित होगी। छोटे बच्चों का हवाला देकर नाम कटवाने की कोशिशें जारी हैं, पर निगम अधिकारियों ने दो टूक कह दिया है कि राष्ट्रीय महत्व के काम में ऐसी व्यक्तिगत दलीलें स्वीकार्य नहीं हैं।
केस-तीन: नेताओं की सिफारिश और रसूख का उपयोग
ड्यूटी कटवाने के लिए नेताओं और रसूखदारों से जमकर फोन लगवाए जा रहे हैं। सिफारिशों में तर्क दिया जा रहा है कि फलां कर्मचारी की ड्यूटी कट गई तो हमारी क्यों नहीं? इस पर प्रशासन ने साफ किया कि केवल गर्भवती महिलाओं को ही विशेष रियायत दी गई है।
जनगणना ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए कर्मचारी कई तरह के बहाने बना रहे हैं, लेकिन हमने सिर्फ गर्भवती महिलाओं के नाम ही ड्यूटी से हटाए हैं। अन्य किसी को भी इससे छूट नहीं दी जा रही है। - संस्कृति जैन, निगमायुक्त
यह भी पढ़ें- भोजशाला केस: हाई कोर्ट में गूंजा हदीस का हवाला, वकील बोले- 'इस्लाम में भी जबरन जमीन पर मस्जिद बनाना गलत'