भोपाल BMHRC में जटिल सर्जरी कर महिला के पैन्क्रियाज से निकाले 15 से अधिक स्टोन... इतने बड़े पत्थर देखकर डॉक्टर भी रह गए हैरान
भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (BMHRC) में डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर एक महिला की जान बचाई। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट की 36 वर्षीय मरीज के पै ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 10 Feb 2026 09:56:02 PM (IST)Updated Date: Tue, 10 Feb 2026 10:02:09 PM (IST)
भोपाल में डॉक्टरों ने दुर्लभ सर्जरी कर 36 वर्षीय महिला के पैन्क्रियाज से 15 से अधिक स्टोन निकाले।HighLights
- 36 वर्षीय महिला की जटिल सर्जरी सफल रही
- क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस से पीड़ित थी मरीज
- डॉक्टरों ने लेटरल पैन्क्रियाटिकोजेजुनोस्टामी की
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: राजधानी के भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (BMHRC) के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग ने जटिल ऑपरेशन कर उत्तर प्रदेश के चित्रकूट निवासी 36 वर्षीय महिला के पैन्क्रियाज (अग्न्याशय) से 15 से अधिक स्टोन निकालकर उसकी जान बचाई। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ पत्थरों का आकार दो सेंटीमीटर तक था, जो अत्यंत दुर्लभ और गंभीर स्थिति मानी जाती है।
लंबे समय से असहनीय दर्द
गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. विशाल पाटिल ने बताया कि मरीज लंबे समय से क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस विद पैन्क्रियाटिक डक्ट स्टोन की समस्या से पीड़ित थी और उसे लगातार पेट में तेज दर्द रहता था। सीटी स्कैन और एमआरसीपी जांच के बाद पैन्क्रियाज में कई पत्थरों की पुष्टि हुई।
विशेष सर्जरी से निकाले स्टोन
डॉक्टरों ने लेटरल पैन्क्रियाटिकोजेजुनोस्टामी सर्जरी करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में पैन्क्रियाज की नली खोलकर पथरियों को बाहर निकाला गया। डा. पाटिल ने बताया कि इतनी अधिक संख्या में स्टोन पाचन प्रक्रिया को बाधित करते हैं और भविष्य में डायबिटीज जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ाते हैं।
सर्जरी में एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. कनिका सुहाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
क्यों बनते हैं पैन्क्रियाज में स्टोन
डॉक्टरों के अनुसार पैन्क्रियाज पाचन और शुगर नियंत्रण से जुड़ा महत्वपूर्ण अंग है। इसमें स्टोन बनने के प्रमुख कारण लंबे समय तक शराब और धूम्रपान, बार-बार सूजन, हार्मोन असंतुलन, आनुवंशिक कारण, कुपोषण और पुरानी पाचन समस्याएं हैं।
बचाव के उपाय
- लंबे समय तक पेट या पीठ दर्द को नजरअंदाज न करें
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें, तले-भुने भोजन से बचें
- कैल्शियम और पोषण स्तर की समय-समय पर जांच कराएं
इनका कहना है
बीएमएचआरसी का लक्ष्य है कि जटिल से जटिल स्थिति में भी मरीजों को सुरक्षित इलाज मिले, ताकि वे बेहतर जीवन की ओर लौट सकें। मरीज की स्थिति अब स्थिर है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
- डॉ. मनीषा श्रीवास्तव, प्रभारी निदेशक, बीएमएचआरसी।