हिंदी में इंजीनियरिंग पढ़ाने की राह मुश्किल, 'तकनीकी' पेंच में फंसा माध्यम, MP में 3 साल में महज 313 छात्र ही मिले
मध्य प्रदेश में हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग पढ़ाने की राह कठिन होती दिख रही है। 150 में से चार कॉलेजों में 224 सीटों पर हिंदी माध्यम से पढ़े हुए इंजीन ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 24 Apr 2026 01:53:29 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Apr 2026 02:01:17 PM (IST)
MP में हिंदी में इंजीनियरिंग के 3 साल में महज 313 छात्र ही मिले (फाइल फोटो)HighLights
- हिंदी में इंजीनियरिंग पढ़ाने की राह मुश्किल
- चार कॉलेजों में 224 सीटें हिंदी माध्यम की
- तीन साल में इन्हें 313 विद्यार्थी ही मिल पाए
अंजली राय, नईदुनिया, भोपाल। हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग पढ़ाने की राह कठिन होती दिख रही है। पाठ्यक्रम, पुस्तक और प्राध्यापकों की कमी से इस माध्यम से पढ़ाई करने की ओर रुझान सीमित है। प्रदेश में सत्र 2022-23 से हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की गई थी। 150 में से चार कॉलेजों में 224 सीटों पर हिंदी माध्यम से पढ़े हुए इंजीनियर बनाए जाने थे, लेकिन हुआ इसके उलट। तीन साल में इस माध्यम से पढ़ाई करने के लिए केवल 313 विद्यार्थी ही मिल पाए।
भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस प्रयास को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की मंजूरी भी मिली थी। इसके बावजूद प्रदेश का कोई भी सरकारी या निजी इंजीनियरिंग कॉलेज इसे पूरी तरह अपना नहीं पाया। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूआईटी ने भी अब तक हिंदी में इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम शुरू नहीं किया है।
प्राध्यापकों का कहना है कि हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने से पहले कई स्तर पर तैयारियां करनी थी, जो नहीं की गईं। इसका असर हर साल प्रवेश के आंकड़ों में दिखता है। वर्ष 2022 में 19 सीटों पर प्रवेश हुआ, 2023 में 90, 2024 में 104 और 2025 में 97 विद्यार्थी मिल पाए। चालू सत्र में केवल 100 विद्यार्थी हिंदी माध्यम वाले हैं।
हिंदी में किताबें तैयार नहीं करा पाए
एआइसीटीई की ओर से इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की किताबों का हिंदी में अनुवाद करने का जिम्मा राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को दिया गया था। संस्थान को 81 किताबों का अनुवाद करना था। अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया है।
एक कॉलेज में ही सबसे अधिक प्रवेश
इंदौर स्थित एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी एंड रिसर्च में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग इन इंडियन लैंग्वेज पाठ्यक्रम हिंदी में शुरू किया गया है। यहां 75 सीटें हैं जिनमें से 78 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इसके लिए तीन सीटें टीएफडब्ल्यू से ली गई हैं।
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जिन संस्थानों में सुविधा वहां प्रवेश की स्थिति
कॉलेज - आवंटित सीट - प्रवेश (2025) - प्रवेश (2024)
एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी एंड रिसर्च इंदौर - 75 - 78 - 73
आईपीएस एकेडमी,इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग इंदौर - 75 - 02 -03
श्री जीएस इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी इंदौर - 37 - 20 - 14
श्री दादाजी इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी खंडवा - 37 - 00 - 14 -
हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वालों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। फैकल्टी की कमी को पूरा कर रहे हैं। पुस्तकें भी तैयार कर रहे हैं- इंदर सिंह परमार, उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा मंत्री।