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मध्य प्रदेश में 'साइलेंट किलर' हेपेटाइटिस का खौफ, प्रदेश का हर 12वां व्यक्ति संक्रमित, 95% मामलों में नहीं दिखते शुरुआती लक्षण

मध्य प्रदेश में हेपेटाइटिस बी और सी तेजी से गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। प्रदेश का हर 12वां व्यक्ति इन संक्रमणों से प्रभावित है।

By mukesh vishwakarmaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 27 Jul 2026 10:04:43 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 10:04:43 PM (IST)
मध्य प्रदेश में 'साइलेंट किलर' हेपेटाइटिस का खौफ, प्रदेश का हर 12वां व्यक्ति संक्रमित, 95% मामलों में नहीं दिखते शुरुआती लक्षण
'साइलेंट किलर' हेपेटाइटिस का खौफ।

HighLights

  1. बिना जांचा खून और असुरक्षित टैटू बढ़ा रहे हेपेटाइटिस
  2. भोपाल के ब्लड बैंक में मिले 4,000 से अधिक संक्रमित
  3. भोपाल में हजारों मरीज हेपेटाइटिस B और C से प्रभावित

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में हेपेटाइटिस बी और सी तेजी से गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। प्रदेश का हर 12वां व्यक्ति इन संक्रमणों से प्रभावित है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को लंबे समय तक अपनी बीमारी का पता ही नहीं चलता।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर हमीदिया अस्पताल के शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश टिक्कस ने कहा कि हेपेटाइटिस का पता अक्सर तब चलता है, जब लिवर काफी हद तक खराब हो चुका होता है। यही कारण है कि इसे साइलेंट किलर कहा जाता है।


बी और सी वायरस धीरे-धीरे लिवर को पहुंचाते हैं नुकसान

डॉ. टिक्कस के मुताबिक हेपेटाइटिस बी और सी वायरस धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं। करीब 95 प्रतिशत मरीजों में शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। जब तक पीलिया, अत्यधिक कमजोरी, भूख कम लगना या पेट में पानी भरने जैसी समस्याएं सामने आती हैं, तब तक कई मामलों में बीमारी लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर तक पहुंच चुकी होती है।

भोपाल में 43 प्रतिशत बच्चे टीके से वंचित

हेपेटाइटिस की रोकथाम में सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-4) के अनुसार मध्य प्रदेश में 12 से 23 माह के 81.5 प्रतिशत बच्चों का ही हेपेटाइटिस बी टीकाकरण पूरा हो सका है। यानी प्रदेश का लगभग हर पांचवां बच्चा अभी भी इस गंभीर संक्रमण के जोखिम में है।

विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड बैंकों में होने वाली नियमित जांच भी संक्रमण की गंभीरता का संकेत दे रही है। भोपाल के सरकारी ब्लड बैंक में अब तक 3,900 हेपेटाइटिस बी और 390 हेपेटाइटिस सी संक्रमितों की पहचान की जा चुकी है। यह केवल उन लोगों का आंकड़ा है जिनकी जांच हुई है। वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।

संक्रमण फैलने की प्रमुख वजहें

जेपी अस्पताल के शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष पंचरत्न के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी के फैलने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें समय पर जांच नहीं कराना, नवजात शिशुओं का टीकाकरण छूट जाना, संक्रमित सुई का उपयोग, बिना जांचा गया रक्त चढ़ाना, दंत चिकित्सा उपकरणों का ठीक से स्टरलाइज न होना तथा असुरक्षित तरीके से टैटू बनवाना प्रमुख हैं।

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हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए उपलब्ध टीका अत्यंत प्रभावी है। यदि जन्म के 24 घंटे के भीतर नवजात को हेपेटाइटिस बी की बर्थ डोज दे दी जाए तो संक्रमण का खतरा करीब 90 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। वहीं, हेपेटाइटिस सी का इलाज अब आधुनिक दवाओं से तीन से छह महीने में संभव है, बशर्ते संक्रमण की समय रहते पहचान हो जाए।