भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में लिफ्ट ऑपरेटरों की हड़ताल, सालभर से नहीं मिली सैलरी
प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया के नए और अत्याधुनिक भवनों में इन दिनों मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 26 Mar 2026 09:53:00 PM (IST)Updated Date: Thu, 26 Mar 2026 09:53:00 PM (IST)
हमीदिया हॉस्पिटल में लिफ्ट ऑपरेटरों की हड़ताल।HighLights
- हमीदिया हॉस्पिटल में लिफ्ट ऑपरेटरों की हड़ताल।
- प्रशासनिक खींचतान और बजट का अभाव।
- मेंटेनेंस बंद होने से बड़ी दुर्घटना का डर।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया के नए और अत्याधुनिक भवनों में इन दिनों मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बजट की कमी और प्रशासनिक खींचतान के चलते पिछले एक साल से लिफ्ट संचालन का 3.25 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है।
नतीजा यह हुआ कि निजी एजेंसी ने ऑपरेटरों की सैलरी रोक दी और तंग आकर सभी ऑपरेटरों ने एक साथ काम छोड़ दिया। अब 11 मंजिला ऊंचे भवन में गंभीर मरीजों और उनके स्वजनों को लिफ्ट के इंतजार में घंटों खड़े रहना पड़ रहा है या मजबूरन सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्रशासनिक खींचतान और बजट का अभाव
जानकारी के अनुसार, हमीदिया के दोनों नए भवनों में लिफ्ट संचालन का जिम्मा एक निजी एजेंसी के पास है, जिसका टेंडर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के जरिए गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) ने कराया था।
शुरुआत में तो भुगतान समय पर हुआ, लेकिन बीते एक साल से जीएमसी ने पीडब्ल्यूडी को फंड ट्रांसफर नहीं किया। फंड रुकते ही एजेंसी ने हाथ खड़े कर दिए, जिससे ऑपरेटरों के घर का चूल्हा जलना मुश्किल हो गया और वे काम छोड़कर चले गए।
मेंटेनेंस बंद होने से बड़ी दुर्घटना का डर
एजेंसी के पास केवल ऑपरेटर उपलब्ध कराने ही नहीं, बल्कि लिफ्ट के रखरखाव का जिम्मा भी था। बजट के अभाव में अब नियमित मेंटेनेंस भी बंद हो गया है। अस्पताल के अधिकारियों का मानना है कि यदि जल्द ही लिफ्ट की सर्विसिंग नहीं हुई, तो चलती लिफ्ट के बीच में अटकने या तकनीकी खराबी से बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
नेत्र विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि उनका विभाग सबसे ऊपरी मंजिल पर स्थित है। लिफ्ट का संचालन प्रभावित होने से न केवल डॉक्टर और स्टाफ, बल्कि आंखों के ऑपरेशन के लिए आने वाले बुजुर्ग मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्ट्रेचर पर ले जाने वाले मरीजों के लिए तो स्थिति और भी चिंताजनक है।
इनका कहना है
'इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेज दी गई है। बजट की मांग के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को निरंतर पत्र लिखे जा रहे हैं। जैसे ही शासन से फंड प्राप्त होगा, बकाया भुगतान कर व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाएगी।' - डॉ. कविता एन सिंह, डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी), भोपाल।