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मुकेश विश्वकर्मा, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक मजबूत करने के लिए राज्य सरकार सभी फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (एफआरयूएस) और ब्लाक (विकासखंड) स्तर के अस्पतालों में ''ब्लड स्टोरेज यूनिट'' (रक्त भंडारण केंद्र) का जाल बिछाने जा रही है। इस योजना के शुरू होने से सबसे बड़ी राहत ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं और सड़क दुर्घटनाओं के शिकार होने वाले लोगों को मिलेगी, जिन्हें अब जिला अस्पताल तक का लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा।
वर्तमान में प्रदेश के कई छोटे जिलों में समृद्ध ब्लड बैंक नहीं हैं। जिला अस्पताल में जैसे-तैसे खून तो मिल जाता है, लेकिन प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और रेड ब्लड सेल्स जैसे विशेष ''ब्लड कंपोनेंट'' के लिए मरीजों को भोपाल, इंदौर या ग्वालियर जैसे बड़े शहरों की ओर भागना पड़ता है। सरकार ने अब प्रदेश के सभी 52 जिलों में ''ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट'' की स्थापना सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। वहीं तहसील स्तर के अस्पतालों में रक्त भंडारण सुविधा विकसित की जाएगी। इसका सीधा लाभ डेंगू, मलेरिया और सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मिलेगा।
तहसील और ब्लाक स्तर पर स्थापित होने वाली ये स्टोरेज यूनिट्स सीधे जिला मुख्यालय के मुख्य ब्लड बैंक से जुड़ी होंगी। इन केंद्रों पर अत्याधुनिक मेडिकल रेफ्रिजरेटर, इन्वर्टर बैकअप और प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन तैनात किए जाएंगे। किस यूनिट में किस ग्रुप का कितना खून उपलब्ध है, इसकी पल-पल की जानकारी डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध होगी, ताकि आपात स्थिति में आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
हम ''ब्लड स्टोरेज यूनिट'' के नेटवर्क को इतना मजबूत कर रहे हैं कि इनके माध्यम से ब्लाक स्तर तक मरीजों को आवश्यकतानुसार ब्लड कंपोनेंट (प्लेटलेट्स, प्लाज्मा आदि) आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। इसके लिए संसाधनों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। - डॉ. रूबी खान, उप-संचालक (ब्लड सेल), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन