भोपाल में खनिज विभाग की 'रहमदिली' पर सवाल; समतलीकरण की आड़ में 600 डंपर कोपरा निकाला, सिर्फ पोकलेन जब्त, डंपर छोड़े
15 एकड़ निजी भूमि के समतलीकरण की अनुमति की आड़ में दो माह में करीब 600 डंपर कोपरा निकालने और बेचने के आरोप लग रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की भूमिका सं...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 03:15:00 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 03:15:00 PM (IST)
कार्रवाई के दौरान मौके पर डंपर खड़े हुए थे लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नहीं पकड़ा। फोटो एआई से तैयार की गई है।HighLights
- राताताल के रोजीवे गांव में 15 एकड़ निजी भूमि की अनुमति बनी विवाद का कारण
- समतलीकरण की अनुमति, दो माह में करीब 600 डंपर कोपरा निकाल कर बेचने के आरोप
- जांच करने आई टीम ने सिर्फ दो पोकलेन मशीनें जब्त कीं, जबकि डंपरों नहीं पकड़ा
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। जिले के राताताल क्षेत्र स्थित रोजीवे गांव में 15 एकड़ निजी भूमि पर समतलीकरण की अनुमति के नाम पर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर खनिज उत्खनन किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो माह की अनुमति अवधि के दौरान करीब 600 डंपर से अधिक कोपरा निकालकर बेचा गया, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही।
मामले में खनिज विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस वजह से निजी भूमि के समतलीकरण के लिए जारी अनुमति अब जांच और विवाद के दायरे में आ गई है।
खनिज माफिया ने ढोया कोपरा
जिला खनिज अधिकारी मेहताब सिंह रावत का कहना है कि रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार तत्कालीन खनिज निरीक्षक पूजा वानखेड़े की रिपोर्ट के आधार पर जिला खनिज अधिकारी ने किसान हरिचरण के नाम 15 एकड़ भूमि के समतलीकरण की अनुमति जारी की थी। आरोप है कि अनुमति मिलने के बाद किसान ने जमीन से निकलने वाले कोपरा के उत्खनन का कार्य कथित खनिज माफिया को सौंप दिया।
बताया जा रहा है कि दो पोकलेन मशीनों और लगभग एक दर्जन डंपरों की मदद से पिछले दो महीनों में 600 से अधिक डंपर कोपरा निकालकर बेचा गया। अनुमति की अवधि 30 जून को समाप्त होनी थी। इसी दिन प्राप्त शिकायत के आधार पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देश पर हुजूर के नायब तहसीलदार शुभम जैन को पुलिस दल के साथ मौके पर भेजा गया।
पोकलेन जब्त की, डंपर छोड़ दिए
मौके पर पहुंची टीम के दौरान खनिज निरीक्षक सुचि माथुर भी मौजूद थीं। उन्होंने समतलीकरण की वैध अनुमति का हवाला देकर डंपरों की जब्ती नहीं होने दी। कार्रवाई के दौरान केवल दो पोकलेन मशीनों को जब्त किया गया, जबकि मौके पर मौजूद अन्य वाहनों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सागौन के पेड़ उखाड़े,नायब तहसीलदार को किया गुमराह
स्थानीय लोगों का आरोप है कि समतलीकरण के दौरान आसपास लगे सागौन के पेड़ों को भी पोकलेन मशीनों से उखाड़ दिया गया। 24 घंटे मशीनें चलाकर निकाले गए कोपरा को लगभग आठ रुपये प्रति वर्गफीट की दर से बेचा गया। समतलीकरण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित खनिज निरीक्षक पर थी, लेकिन निगरानी नहीं की।
सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के समय नायब तहसीलदार शुभम जैन को समतलीकरण की अनुमति का हवाला देकर यह विश्वास दिलाया गया कि कार्य वैध है। बाद में उन्होंने पूरे मामले की जानकारी एसडीएम को भेज दी। अब प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट के परीक्षण और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ चुके हैं सवाल
खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। अचारपुरा के डोबरा रोड स्थित कुठार की चंदेरी झील में जल गंगा संवर्धन अभियान के नाम पर कथित अवैध उत्खनन के मामले में भी विभाग की कार्रवाई विवादों में रही थी।
उस प्रकरण में तत्कालीन जिला खनिज अधिकारी एलएम गोयल के पुत्र शुभम गोयल को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देकर राहत दे दी गई थी।
वर्तमान जिला खनिज अधिकारी का कहना है कि विभागीय कार्रवाई संबंधित खनिज निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर ही की जाती है और प्रस्तुत रिपोर्ट में अवैध खनन व किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से अंकित नहीं की गई है।