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भोपाल में ₹5 करोड़ की सरकारी जमीन का घोटाला, EOW ने कॉलोनाइजर कंपनी के 5 निदेशकों पर दर्ज की FIR

ईओडब्ल्यू एजेंसी की जांच में सामने आया कि कालोनी के स्वीकृत नक्शे में स्कूल, पार्क और खुली जगह के लिए छोड़े गए भूखंड शुरू से ही नगर निगम के थे, कंपनी ...और पढ़ें

By Brijendra RishishwarEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 06:40:24 PM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 06:40:24 PM (IST)
भोपाल में ₹5 करोड़ की सरकारी जमीन का घोटाला, EOW ने कॉलोनाइजर कंपनी के 5 निदेशकों पर दर्ज की FIR
भोपाल में ₹5 करोड़ की सरकारी जमीन का घोटाला

HighLights

  1. निगम की 5 करोड़ की आरक्षित जमीन अवैध रूप से बेची गई
  2. बुजुर्ग महिला का प्लॉट हड़पा, कुएं को पाटकर भी प्लॉट बेचा
  3. ईओडब्ल्यू (EOW) ने BNS की गंभीर धाराओं में दर्ज की FIR

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। पिपलानी के पटेल नगर में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने स्कूल और अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित नगर निगम की पांच करोड़ रुपये की ज़मीन हड़पकर बेचने के मामले में कालोनाइज़र कंपनी मेसर्स गंधर्व लैंड एंड फाइनेंस प्रा.लि. के निदेशक अनुज गोवर, जय प्रताप सिंह यादव, अभिषेक आनंद, मनीष नायक और प्रेमानंद नायक पर अपराध दर्ज किया है। यह कार्रवाई एक शिकायत की विस्तृत जांच के बाद गुरुवार को एफआइआर दर्ज की गई।

नगर निगम की आरक्षित जमीन को निजी बताकर बेचा

हम बता दें कि लगभग 90 एकड़ में बसी रायसेन रोड स्थित हथाईखेड़ा खजूरी खुर्द पटेल नगर कॉलोनी काफी पुरानी है। ईओडब्ल्यू एजेंसी की जांच में सामने आया कि कालोनी के स्वीकृत नक्शे में स्कूल, पार्क और खुली जगह के लिए छोड़े गए भूखंड शुरू से ही नगर निगम के थे, कंपनी को कभी उन पर मालिकाना हक नहीं मिला। इसके बावजूद कंपनी के पूर्व संचालक के निधन के बाद निदेशक बने अनुज गोवर ने 27 नवंबर 2024 को स्कूल के लिए आरक्षित 1.212 एकड़ ज़मीन को अपनी बताकर जय प्रताप सिंह यादव और अभिषेक आनंद को 3.90 करोड़ रुपये में बेच दिया।


बुजुर्ग महिला से धोखाधड़ी और कुएं को पाटकर प्लॉट बेचने का फर्जीवाड़ा

वहीं दूसरे मामले में एक बुजुर्ग महिला ने 1978 में प्लाट क्रमांक ई-12 के लिए रजिस्ट्रेशन कराकर पूरी राशि चुका दी थी, लेकिन कंपनी वर्षों तक रजिस्ट्री टालती रही। उपभोक्ता आयोग में मामला जाने पर कंपनी ने उसी प्लाट पर फर्जी दावेदार खड़े कर सिविल कोर्ट में झूठा विवाद बनाया, फिर उन्हीं फर्जी दावेदारों से समझौता कर असली आवंटी को बिना बताए यह प्लाट मनीष नायक और प्रेमानंद नायक को 1.10 करोड़ रुपये में बेच दिया। जांच में यह भी पाया गया कि पेयजल आपूर्ति के लिए बनाए तीन कुओं में से एक को पाटकर वहां भी प्लाट बेचा गया, और कालोनी में आज तक सड़क, सीवर, नाली व पार्क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं बनाई गईं।

नगर निगम की कार्रवाई और EOW द्वारा गंभीर धाराओं में FIR

नगर निगम भोपाल ने समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी, और शासन स्तर की समीक्षा बैठक में भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। दोनों प्रकरणों को मिलाकर करीब पांच करोड़ रुपये की सरकारी व आरक्षित संपत्ति गलत तरीके से बेचे जाने की पुष्टि प्रथम दृष्टया हुई है। इन तथ्यों के आधार पर ईओडब्ल्यू ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र के लिए दंड), 229(2) (झूठी गवाही देना), 316(5) (आपराधिक विश्वासघात) एवं 318(2) (धोखाधड़ी) के तहत आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

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