
मदनमोहन मालवीय, नवदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर जुर्माना तो करोड़ों रुपये का लगाया जा रहा है, लेकिन उसकी वसूली के मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की रफ्तार सुस्त है। स्थिति यह है कि मिलावटखोरों पर तीन करोड़ 15 लाख 83 हजार 500 रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया, लेकिन विभाग अब तक सिर्फ एक करोड़ 23 लाख 71 हजार 150 रुपये ही वसूल पाया है।
यानी कुल लगाए गए जुर्माने का करीब 39 प्रतिशत ही सरकारी खजाने तक पहुंचा। शेष एक करोड़ 92 लाख रुपये से अधिक की राशि की वसूली बाकी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार विशेष अभियान के तहत पिछले तीन महीने में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले 1894 खाद्य कारोबारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में जिलों के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी के समक्ष कार्रवाई की गई।
इनमें से 1081 प्रकरणों में संबंधित कारोबारियों पर कुल तीन करोड़ 15 लाख 83 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। खाद्य कारोबारियों से एक करोड़ 23 लाख 71 हजार 150 रुपये की राशि वसूल की गई है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक मनोज पुष्प का कहना है कि अभियान का उद्देश्य आम लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा मिलावटखोरों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके लिए खाद्य पदार्थों के निर्माण से लेकर भंडारण और विक्रय तक निगरानी रखी जा रही है। मिलावट के खिलाफ यह विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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भोपाल में खाद्य पदार्थों में मिलावट के 54 मामलों में छह लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि विभाग चार लाख 36 हजार 500 रुपये ही वसूल सका। यानी करीब 67 प्रतिशत राशि की वसूली हुई है, शेष वसूली किया जाना अभी बाकी है।
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