PM अभ्युदय योजना में घोटाला: मप्र में कंपनियों पर लगे फर्जी प्लेसमेंट के आरोप; विभाग ने रोका भुगतान
कई प्रशिक्षणार्थियों ने नौकरी मिलने से इनकार किया है। वहीं, दो प्रतिष्ठानों ने उनके नाम से जारी बताए जा रहे नियुक्ति पत्रों को फर्जी बताते हुए मुहर और हस्ताक्षर को भी गलत बताया है।
Publish Date: Fri, 30 Oct 2026 01:49:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 30 Oct 2026 01:49:04 PM (IST)
HighLights
- 32.41 करोड़ रुपये की योजना में गड़बड़ी का संदेह
- 70 प्रतिशत प्रशिक्षणार्थियों को प्लेसमेंट देने का था लक्ष्य
- RTI से जानकारी सामने आने के बाद मैपसेट ने रोका भुगतान
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार दिलाने की प्रधानमंत्री अभ्युदय योजना में फर्जी प्लेसमेंट का संदेह है। योजना के तहत चयनित एजेंसियों को युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ ही उनमें से 70 प्रतिशत को रोजगार दिलाने का लक्ष्य दिया गया था, पर कई प्रशिक्षणार्थियों ने नौकरी मिलने से इन्कार किया है।
वहीं, दो प्रतिष्ठानों ने उनके नाम से जारी बताए जा रहे नियुक्ति पत्रों को फर्जी बताते हुए उन पर लगी मुहर और हस्ताक्षर को भी गलत बताया है।
आरटीआई से हुआ खुलासा
सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सामने आई इस जानकारी के बाद अब मप्र रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद (मैपसेट) इसका सत्यापन कराने जा रहा है। फिलहाल भुगतान रोक दिया गया है। मामला 2020-21 और 2021-22 का है।
आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास कार्यालय के स्वीकृति आदेशों के अनुसार, योजना के लिए कुल 32.41 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। एक एजेंसी के लिए 355 युवाओं को रोजगार दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि दूसरी एजेंसी का लक्ष्य 420 युवाओं को प्लेसमेंट दिलाना था।
लक्ष्य पूरा नहीं तो रोका भुगतान
अनुसूचित कल्याण विभाग के सचिव सत्येंद्र सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद 70 प्रतिशत प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार दिलाने का लक्ष्य प्रशिक्षण देने वाली एजेंसियों को दिया गया था। 70 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारण एजेंसियों का भुगतान रोका गया है। वहीं, मैपसेट के प्रबंध निदेशक तरुण राठी ने कहा कि मामले की जांच कराएंगे। भुगतान रोक दिया गया है।
बता दें इस योजना में 10वीं कक्षा उत्तीर्ण युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।