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भोपाल में मैनिट हॉस्टल में बिगड़े हालात, दूषित पानी और गंदगी से 80 से ज्यादा छात्र बीमार

भोपाल के मैनिट हॉस्टलों में पानी, सफाई और भोजन की खराब व्यवस्था से छात्र परेशान हैं। दूषित पानी व भोजन से 80 से अधिक छात्र बीमार होने का दावा किया गया...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Wed, 15 Jul 2026 09:27:40 PM (IST)Updated Date: Wed, 15 Jul 2026 09:27:40 PM (IST)
भोपाल में मैनिट हॉस्टल में बिगड़े हालात, दूषित पानी और गंदगी से 80 से ज्यादा छात्र बीमार
भोपाल में मैनिट हॉस्टल में बिगड़े हालात।

HighLights

  1. दूषित पानी और भोजन से 80 छात्र बीमार होने का दावा।
  2. हॉस्टलों में पानी, सफाई और शौचालयों की हालत बेहद खराब।
  3. छात्रों ने रखरखाव शुल्क के बावजूद सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के हॉस्टल नंबर-9 और 11 में रहने वाले छात्रों ने मूलभूत सुविधाओं की गंभीर कमी को लेकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। छात्रों का आरोप है कि लंबे समय से पानी की अनियमित आपूर्ति, गंदगी, खराब भोजन और जर्जर छात्रावास की वजह से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

उनका कहना है कि दूषित पानी और भोजन के कारण अब तक 80 से अधिक छात्र बीमार पड़ चुके हैं। कई छात्रों का उपचार शारदा अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में चल रहा है। छात्रों का कहना है कि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।


पानी की किल्लत और गंदगी से बढ़ी परेशानी

छात्रों के अनुसार छात्रावास में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। सुबह के समय पानी नहीं आने से नहाने, शौच और अन्य दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं अधिकांश शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होने से वे उपयोग के योग्य नहीं रह गए हैं। गंदगी और बदबू के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।

परिसर में कचरा, जर्जर भवन और कर्मचारियों की कमी

छात्रों ने बताया कि हॉस्टल परिसर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। खुले में घूमने वाले सुअर और आवारा कुत्ते स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। दूसरी ओर, छात्रावास भवन की मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई है। सफाई और रखरखाव के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की कमी के कारण समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

रखरखाव शुल्क के बावजूद सुविधाओं का अभाव

छात्रों का कहना है कि प्रत्येक सेमेस्टर में प्रत्येक छात्र से 10,500 रुपये छात्रावास रखरखाव शुल्क लिया जाता है, लेकिन इसके अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं। उन्होंने मांग की है कि परिसर की नियमित सफाई कराई जाए, पर्याप्त कर्मचारी नियुक्त किए जाएं, भोजन और पेयजल की गुणवत्ता की जांच हो तथा बीमार छात्रों का समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाए। साथ ही लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

प्रशासन ने जांच शुरू की

मामले पर डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. आर.एन. यादव ने बताया कि फिलहाल चार छात्रों में फूड पॉइजनिंग की पुष्टि हुई है और उनका इलाज शारदा अस्पताल में चल रहा है। उन्होंने कहा कि पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। छात्रों का कहना है कि यह केवल सुविधाओं का नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।