
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के निर्णय को अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व इसकी तैयारी कर रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं की राय ली जा रही है। मीनाक्षी नटराजन भी दिल्ली में हैं। अगले सप्ताह चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। पार्टी का प्रयास है कि 21 जून के पहले राहत मिल जाए क्योंकि इसके बाद निर्विरोध निर्वाचित भाजपा के तीनों सदस्य तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट द्वारा शपथ ले ली जाएगी।
बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी की याचिका निरस्त कर दी थी। निर्वाचन आयोग से भी मीनाक्षी नटराजन को कोई राहत नहीं मिली है। नियमानुसार चुनाव की घोषणा के 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर करनी होती है, इसलिए पार्टी ठीक से तैयारी कर याचिका प्रस्तुत करेगी। कई ऐसे उदाहरण हैं जब अलग-अलग हाई कोर्ट ने चुनाव याचिकाओं में बड़े उलटफेर वाले निर्णय दिए हैं, यही कारण है कि कांग्रेस हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि बहुत जल्द चुनाव याचिका दायर करेंगे।
उधर, विरोध के लिए दिल्ली गए कांग्रेस के अधिकतर विधायक प्रदेश में लौट आए हैं। कुछ रविवार को पहुंच जाएंगे। नामांकन निरस्त किए जाने के निर्णय के विरोध में पार्टी के अलग-अलग संगठन 15 से 17 जून के बीच जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे। 15 जून को युवा कांग्रेस, 16 को एनएसयूआइ और 17 जून को महिला कांग्रेस का प्रदर्शन होगा।
हाई कोर्ट जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के अग्रवाल कहते हैं मीनाक्षी नटराजन के मामले में एक ही रास्ता चुनाव याचिका है। इसमें तीनों उम्मीदवार जो निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं उन्हें पक्षकार बनाना होगा। कारण, सभी निर्विरोध निर्वाचित हुए, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि महेश केवट मीनाक्षी नटराजन की जगह निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में यह नहीं कह सकते कि किसका निर्वाचन निरस्त हो सकता है। गवाही कराने के लिए तीनों को अवसर मिलेगा। निर्वाचन हुआ ही नहीं, इसलिए यह भी नहीं कह सकते कि प्रथम वरीयता के मत किसे मिले हैं।
अधिसूचना जारी होने के 45 दिन के भीतर याचिका दायर करना होता है। राज्यसभा की चुनाव याचिका हाई कोर्ट में ही लगती है। निर्वाचन याचिका छह माह में निपटाने का प्रयास किया जाता है, पर कई मामलों में कोर्ट की व्यस्तता के चलते देरी भी होती है। शपथ लेने के बाद भी यदि निर्वाचन रद होता है तो सब समाप्त हो जाएगा।
मीनाक्षी का नामांकन रद किए जाने को लेकर कांग्रेस के प्रदेश महासचिव रवि जोशी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना केवल एक उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया, निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर आघात है। कांग्रेस नेतृत्व लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है कि चुनावी प्रक्रिया कानून के अनुरूप संचालित होगी या राजनीतिक दबावों के आधार पर।
जिला कांग्रेस कमेटी भोपाल ग्रामीण के प्रभारी मनोज राजानी ने कहा जिस निजी परिवाद का उल्लेख किया गया है, उसमें मीनाक्षी नटराजन जी को अभियुक्त नहीं बल्कि प्रतिवादी के रूप में दर्शाया गया है। दोनों की कानूनी स्थिति अलग-अलग होती है और उन्हें समान मानकर की गई व्याख्या कई गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े करती है।