
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच देश के विभिन्न राज्यों की ट्यूशन फीस के तुलनात्मक आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की ट्यूशन फीस के मामले में मध्य प्रदेश देश का 5वां सबसे महंगा राज्य है। यहां छात्रों से सालाना 1,00,000 रुपये ट्यूशन फीस ली जा रही है, जबकि इंटर्नशिप के दौरान मानदेय (स्टाइपेंड) देने के मामले में प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में बेहद पीछे है।
राज्यों की वार्षिक ट्यूशन फीस की सूची में पंजाब 1,83,000 रुपये के साथ देश में पहले स्थान पर है। वहीं, महाराष्ट्र 1,52,000 रुपये वार्षिक फीस के साथ दूसरे स्थान पर खड़ा है। इसके बाद उत्तराखंड 1,45,000 रुपये के साथ तीसरे और केरल 1,19,835 रुपये फीस के साथ चौथे स्थान पर है। इनके ठीक बाद मध्य प्रदेश 1 लाख रुपये सालाना फीस के साथ पांचवें पायदान पर है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन राज्यों में मेडिकल शिक्षा की ट्यूशन फीस मप्र की तुलना में काफी कम है, वहां इंटर्न डॉक्टरों को कहीं अधिक मानदेय दिया जा रहा है। ओडिशा में वार्षिक फीस केवल 22,000 रुपये है, लेकिन इंटर्न्स को 44,319 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है। पश्चिम बंगाल में फीस मात्र 11,350 रुपये है, जबकि स्टाइपेंड 43,099 रुपये दिया जा रहा है। तमिलनाडु और झारखंड राज्यों में एमबीबीएस की सालाना ट्यूशन फीस 10 हजार रुपये से भी कम (महज 6,000 रुपये) है, फिर भी वहां डॉक्टरों को 25,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
इसके विपरीत मध्य प्रदेश में छात्र हर साल एक लाख रुपये भारी-भरकम ट्यूशन फीस जमा करते हैं, लेकिन अस्पतालों में 24 से 36 घंटे की कठिन ड्यूटी करने के बाद भी उन्हें मात्र 14,337 रुपये प्रतिमाह का मानदेय मिलता है। इसी भारी आर्थिक असंतुलन के विरोध में प्रदेश के करीब 3,600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर सड़कों पर उतरे हुए हैं और स्टाइपेंड को बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें- एमपी के इस जिले में है विश्व का इकलौता शिवलिंग, जहां दूध-जल नहीं सिंदूर से होता है अभिषेक