
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के 11 लाख से अधिक शासकीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत भरी खबर है कि छह वर्ष से अटकी कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को शीघ्र ही हरी झंडी मिल सकती है। इसे स्वीकृति के लिए इसी माह कैबिनेट में लाने की तैयारी है। प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना का संचालन करने वाली स्टेट हेल्थ एजेंसी ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसमें प्रति कर्मचारी परिवार वर्ष में 20 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रस्ताव है। वहीं, पेंशनरों के लिए पांच लाख रुपये तक की सुविधा मिलेगी।
प्रीमियम में सरकार के अंशदान के अतिरिक्त कुछ हिस्सा कर्मचारियों और पेंशनरों को भी मिलाना होगा। अधिकारियों के अनुसार इसमें कर्मचारियों से मूल वेतन का एक प्रतिशत और पेंशनरों से चार प्रतिशत अंशदान प्रतिमाह लिया जाएगा। मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है।
बता दें, वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे कमल नाथ ने कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया था। इसे एक अप्रैल, 2020 से लागू किया जाना था लेकिन इसके पहले ही कांग्रेस सरकार गिर गई। इसके बाद भाजपा सरकार में लगभग चार वर्ष से योजना को लेकर मंथन चल रहा था। दूसरे राज्यों के मॉडल का भी अध्ययन किया गया। अब जाकर इसका ड्राफ्ट तैयार हो पाया है।
इसमें आयुष्मान भारत योजना की तरह हितग्राही का फोटोयुक्त यूनिक आईडी डिजिटल कार्ड बनाया जाएगा। योजना का संचालन राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा किया जाएगा, जिसमें कानूनी, बीमा क्षेत्र और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ रहेंगे। टास्क फोर्स का गठन भी किया जाएगा, जो योजना की समीक्षा और नीतिगत निर्णय से जुड़े मामले देखेगी।
कर्मचारी पति-पत्नी, माता-पिता, आश्रित दो बच्चे, दत्तक बच्चे, तलाकशुदा पुत्री और पेंशनर पति और उसकी पत्नी या पेंशनर पत्नी और उसके पति योजना के अंतर्गत उपचार के लिए पात्र होंगे। बीमित कर्मचारी को ओपीडी, दवा और उपकरण के लिए 20 हजार रुपये प्रतिवर्ष मिलेंगे। उपचार के लिए अस्पताल अनुबंधित किए जाएंगे, पर आकस्मिक परिस्थितियों में गैर संबद्ध अस्पतालों में उपचार कराया जा सकेगा। इसमें होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति कर्मचारी को बाद में की जाएगी।
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