• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

एमपी में कम बारिश की आशंका पर सरकार अलर्ट... हर जिले की बनेगी इमरजेंसी योजना, बोवनी पर दी बड़ी सलाह

किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए जागरूक किया जाए। जल संरक्षण और उसके सदुपयोग को लेकर नगरीय निकाय से लेकर पंचायतर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 09:31:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 09:31:33 PM (IST)
एमपी में कम बारिश की आशंका पर सरकार अलर्ट... हर जिले की बनेगी इमरजेंसी योजना, बोवनी पर दी बड़ी सलाह
एमपी में कम बारिश की आशंका पर सरकार अलर्ट

HighLights

  1. एमपी में कम बारिश की आशंका पर सरकार अलर्ट, जिलों की बनेगी योजना
  2. सीएम मोहन यादव की किसानों को सलाह, खेतों में नमी आने पर ही करें बोवनी
  3. जलाशयों में पानी के उपयोग के लिए पेयजल और सिंचाई को पहली प्राथमिकता

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है। प्रत्येक जिले की आकस्मिक कार्ययोजना बनाई जाएगी। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए किसानों को समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए जागरूक किया जाए। जल संरक्षण और उसके सदुपयोग को लेकर नगरीय निकाय से लेकर पंचायतराज संस्थाएं काम करेंगी।

ये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को संभावित अल्पवर्षा की स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि इसे चुनौती नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समयबद्ध तैयारी के अवसर के रूप में लिया जाए। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाया जाए। ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं।


जल्दबाजी में न करें बोवनी

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान जल्दबाजी में बुआई न करें। जब खेतों में पर्याप्त नमी आ जाए, उसके बाद ही बोवनी की जाए। नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो।

नगरीय निकाय करेंगे दो वर्ष की तैयारी

बैठक में बताया गया कि सभी नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों का चिह्नांकन एवं टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 के अंतर्गत जल प्रदाय योजनाएं समय पर पूरी हों, यह तय किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की ग्रामवार समीक्षा, बंद व अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत का 90 दिवसीय अभियान चलेगा।

जलाभिषेक 2.0 अंतर्गत प्रदेश में पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं का सर्वे एवं जीर्णोद्धार, वीबी जी रामजी योजना से प्रति विकासखंड न्यूनतम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन दो वर्ष में किया जाएगा। भूजल पुनर्भरण अभियान के तहत सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टाप डैम एवं खेत-तालाब निर्माण के लिए 'खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में' सिद्धांत पर मिशन मोड में कार्यक्रम चलाया जाएगा।

प्रत्येक जिला की बनेगी आकस्मिक फसल योजना

सरकार हर जिले के लिए आकस्मिक फसल योजना तैयार करेगी। इसमें कम जल मांग वाली फसलों, दलहन, तिलहन, श्रीअन्न (मोटे अनाज) प्रोत्साहन एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन सुनिश्चित किया जाएगा। ग्रीष्मकालीन धान और मूंग की खेती पर जल उपलब्धता आधारित सलाह देने के साथ धान क्षेत्रों में सीधी बुवाई एवं वैकल्पिक गीला-सूखा पद्धति को लेकर योजना तैयार होगी।

पेयजल, सिंचाई और फिर बिजली उत्पादन के लिए पानी को प्राथमिकता

सरकार ने तय किया है कि जल विद्युत एवं जलाशय प्रबंधन के तहत सभी प्रमुख जलाशयों (इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर, गांधीसागर) के लिए प्रविधान का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। पहले पेयजल, फिर सिंचाई और फिर विद्युत उत्पादन के लिए जलाशय के पानी का उपयोग होगा। रियल-टाइम मानिटरिंग एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड बनाए जाएंगे।

यह भी पढ़ें- भोपाल में बड़ा खतरा... मोबाइल एप से हैक हो रहे चलते ई-रिक्शे, 'नईदुनिया' की पड़ताल में हुआ लाइव खुलासा

ये भी दिए निर्देश

  • जल गंगा संवर्धन की तर्ज पर जनभागीदारी आधारित अभियान चलाएं।
  • क्षति सर्वे के लिए राजस्व, कृषि एवं पंचायत अमले का संयुक्त प्रशिक्षण अभी से हो।
  • पूर्ण डिजिटल क्राप सर्वे एवं सैटेलाइट इमेजरी आधारित क्षति आकलन प्रणाली का सत्यापन कराया जाए, जिससे सर्वे 15 दिवस में पूरा हो सके।
  • फसल बीमा के विस्तार के साथ दावों का निराकरण जल्द हो, यह सुनिश्चित हो।