
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल में बीते 15 दिनों से अच्छी धूप नहीं खिली है। 8 अगस्त के बाद से ऐसा एक भी दिन नहीं रहा, जब दिनभर सूरज चमका हो। आसमान में बादलों का डेरा जरूर है, लेकिन ये बादल जमकर नहीं बरस रहे। जबकि दोनों समुद्री छोरों से पर्याप्त मात्रा में नमी आ रही है, फिर भी शहर में केवल फुहारें पड़ रही हैं। यही कारण है कि नागरिकों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जोरदार वर्षा कब होगी।
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि हवाओं का सीधे निकलना इसकी मुख्य वजह है। तेज वर्षा के लिए हवा का घुमावदार चक्रवात जरूरी होता है। शहरवासी जहां जोरदार वर्षा का इंतजार कर रहे हैं, वहीं मौसम विभाग के आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं। भोपाल में एक जून से लेकर अब तक सामान्य 721.1 मिलीमीटर के मुकाबले 772.5 मिलीमीटर पानी गिरा है, जो औसत से 7 प्रतिशत अधिक है। रविवार को प्रदेश में सबसे अधिक सीधी में 47 मिलीमीटर, टीकमगढ़ 41 मिलीमीटर, दतिया 37 मिलीमीटर और सागर 34 मिलीमीटर में जोरदार वर्षा हुई।
वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम से आ रही हवाएं भोपाल के ऊपर टिकने के बजाय सीधे निकल रही हैं। यह पूरी नमी उत्तर-पूर्वी मप्र में जाकर जमा हो रही है, जिससे वहां जोरदार वर्षा हो रही है, जबकि राजधानी केवल बादलों की छांव में सिमटी हुई है।
प्रदेश में दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के कारण कम ऊंचाई के घने बादल बने हुए हैं, जो धूप को धरती तक नहीं पहुंचने दे रहे। वहीं वर्तमान मानसूनी द्रोणिका उत्तर प्रदेश से होकर गुजर रही है, जिसका सीधा असर भोपाल पर नहीं पड़ रहा है।
मप्र में एक जून से 23 अगस्त तक औसत से 11 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी मप्र में सामान्य से 8 प्रतिशत और पश्चिमी मप्र में 14 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक वर्षा वाले जिलों में बुरहानपुर पहले नंबर पर है, जहां सामान्य से 30 प्रतिशत अधिक पानी बरसा है। इसके बाद भिंड में 25 प्रतिशत और अनूपपुर, सतना, सिंगरौली व खरगोन में 19 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।
दूसरी तरफ सबसे कम वर्षा मैहर में हुई है, जहां सामान्य से 50 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा अलीराजपुर में 48 प्रतिशत, मुरैना में 37 प्रतिशत, पांढुर्णा व नर्मदापुरम में 35 प्रतिशत और धार में 33 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।
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अगस्त में केवल 9 से 13 तारीख के बीच बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से अच्छी वर्षा दर्ज की गई थी। इसके बाद से सिस्टम उत्तर-पूर्वी मप्र के पास सक्रिय है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से पर्याप्त नमी आ रही है, लेकिन जब तक चक्रवाती हवाओं का घेरा नहीं बनता, तब तक तेज वर्षा की संभावना कम है। कम ऊंचाई के बादलों की वजह से धूप रुकी हुई है। भोपाल में जोरदार वर्षा का अगला दौर तभी शुरू होगा, जब बंगाल की खाड़ी से उठने वाला कोई मजबूत सिस्टम यहां सक्रिय असर डालेगा। - अजय कुमार शुक्ला, मौसम विशेषज्ञ
शहर — वर्षा मिलीमीटर में
दमोह — 26.0
शिवपुरी — 12.0
उमरिया — 4.0
मलाजखंड — 5.0
बैतूल — 0.4
मंडला — 0.4
सतना — 0.4
गुना — 0.2
खजुराहो — 2.0