
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में 10 अप्रैल से प्रारंभ होने जा रही है। शेष संभागों में 15 अप्रैल से होगी। सरकार ने 10 दिन गेहूं की खरीदी इसलिए आगे बढ़ाई ताकि एक बार यह प्रारंभ हो तो फिर बीच में कोई अवरोध न आए। दरअसल, पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम को देखते हुए सरकार फूंक-फूंककर कदम रख रही है। पेट्रोलियम पदार्थ की आवक प्रभावित होने का असर प्लास्टिक के बैग की आपूर्ति पर भी पड़ा है, इसलिए एक बार उपयोग में लाए गए जूट के बोरों से काम चलाया जाएगा।
इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। प्रदेश के पास पहले से 35 लाख टन गेहूं रखने के लिए बोरे उपलब्ध हैं। जूट कमिश्नर ने ढाई लाख बोरे मध्य प्रदेश को आवंटित किए हैं, जो एक सप्ताह में मिल जाएंगे। वहीं, एक लाख 80 हजार गठान (एक गठान में पांच सौ) बोरे की आपूर्ति के लिए टेंडर किए गए हैं। भारत सरकार से मध्य प्रदेश को इस बार 78 लाख टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य मिला है।
समर्थन मूल्य 2,585 में 40 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलाकर सरकार किसान को प्रति क्विंटल 2,625 रुपये देगी। खरीदी पहले 16 मार्च, फिर एक अप्रैल और अब 10 अप्रैल से निर्धारित की गई। तिथि आगे बढ़ाने का मुख्य आधार बोरे की कमी बताई गई। उधर, भारत सरकार से अनुमति लेकर एक बार उपयोग किए गए जूट के बोरे लेने का निर्णय किया गया है। इसके लिए नागरिक आपूर्ति निगम ने टेंडर जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही एक लाख प्लास्टिक बैग लेने के लिए भी टेंडर कर दिए हैं।
प्रदेश में इस बार 19 लाख चार हजार किसानों ने उपज बेचने के लिए पंजीयन कराया है। यह पिछले साल की तुलना में चार लाख अधिक है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भले ही उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख टन निर्धारित किया गया है, लेकिन उपज इससे अधिक आ सकती है। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने अधिकारियों के साथ उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा की। इसमें निर्देश दिए गए कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इस पर विशेष ध्यान दें। भुगतान तीन दिन में आधार से लिंक खाते में सुनिश्चित किया जाए।
समर्थन मूल्य पर उपार्जन को लेकर सरकार के दावों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में आरोप लगाया कि जिस तरह से बार-बार खरीदी की तिथि बढ़ाई जा रही है, उससे साफ है कि कोई तैयारी नहीं है। प्रदेश का किसान आज कर्ज में डूबा है। कर्ज की किस्त भरने की तिथि निकल चुकी है, लेकिन सरकार ने किसानों से उपज तक नहीं खरीदी। ऐसे में कर्ज अदायगी कैसे होगी, इस पर सरकार मौन है।
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