• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

MP में वनकर्मियों के लिए बड़ा फैसला; अब गोली चलाने पर सीधे नहीं होगी FIR, पहले होगी मजिस्ट्रियल जांच

मध्य प्रदेश में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में लगे वनकर्मियों द्वारा गोली चलाने पर सीधे एफआईआर नहीं होगी। इसके लिए पहले मजिस्ट्रियल जांच करनी पड़ेगी।

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sat, 08 Aug 2026 08:51:48 AM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 08:51:48 AM (IST)
MP में वनकर्मियों के लिए बड़ा फैसला; अब गोली चलाने पर सीधे नहीं होगी FIR, पहले होगी मजिस्ट्रियल जांच
फोटो एआई से तैयार की गई है।

HighLights

  1. वनकर्मियों के हथियार चलाने पर अब सीधे एफआईआर नहीं होगी
  2. पहले मजिस्ट्रियल जांच, अनावश्यक या अनुचित पाए जाने पर आपराधिक कार्रवाई
  3. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत नई व्यवस्था

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में लगे वनकर्मियों द्वारा गोली चलाने पर सीधे एफआईआर नहीं होगी। इसके लिए पहले मजिस्ट्रियल जांच करनी पड़ेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि वनकर्मी ने हथियार का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया है।

यदि अनावश्यक या दुर्भावना से किया जाना सिद्ध होता है तो फिर आपराधिक कार्रवाई होगी अन्यथा नहीं। इस संबंध में वन विभाग ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी की।

BNS के तहत व्यवस्था लागू

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई बार वनकर्मियों को गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। अपनी, वन भूमि, वन संपदा, वन्यजीवों की रक्षा के लिए उन्हें हथियार का उपयोग भी करना पड़ सकता है। इसके बाद भी उनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिए जाते हैं।


ऐसी स्थिति न हो, इसके कारण वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत संज्ञान लेते हुए 2026 में जारी किए गए निर्देशों के अनुसार तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के प्रावधान अनुसार यह व्यवस्था बनाई है कि किसी भी वनकर्मी द्वारा जब भी हथियार का प्रयोग किया जाएगा, तब प्रत्येक ऐसी घटना की मजिस्ट्रियल जांच की जाएगी।

हथियारों के अनावश्यक उपयोग पर कार्रवाई

पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई, जिसमें आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया जाना है या गिरफ्तारी की जानी सम्मिलित है, तभी की जाएगी जब जांच के परिणाम से यह निष्कर्ष प्राप्त हो जाएं कि हथियार का प्रयोग अनावश्यक या अनुचित था।

जांच का प्रतिवेदन शासन द्वारा स्वीकार करने के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।

यह भी पढ़ें- मप्र में जंगलराज: 14.21 लाख एकड़ वन भूमि पर भू-माफिया का कब्जा; सवाल सुनते ही वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने काटा फोन

लटेरी में वन अमले पर हुआ था हमला

उल्लेखनीय है कि वनकर्मी द्वारा हथियार के उपयोग और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई का मुद्दा विदिशा जिले के लटेरी वन क्षेत्र में गोलीकांड के बाद चर्चा में आया था। 9 अगस्त 2022 को लटेरी क्षेत्र के खटयापुरा जंगल में लकड़ी तस्करी रोकने गई वन विभाग की टीम और ग्रामीणों में विवाद हो गया था।

घटना में आदिवासी युवक चैन सिंह की मौत हो गई थी और तीन लोग घायल हुए थे। डिप्टी रेंजर पर हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। तत्कालीन शिवराज सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था।

इन पर लागू होगा पर प्रावधान

वनरक्षक, वनपाल, उपवन क्षेत्रपाल, वन क्षेत्रपाल, सहायक वन संरक्षक, उपवन मंडल अधिकारी, उप वन संरक्षक, उपसंचालक, वन मंडल अधिकारी, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्र संचालक तथा ऐसे सभी वन अधिकारी, जो वन एवं वन्य जीव संरक्षण संवर्धन तथा प्रबंधन से संबंधित लोक व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व संभालते हैं।