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महंगे मेडिकल सामान और दवाओं की मनमानी पर नहीं लगेगी रोक, मार्जिन तय करने से NPPA का इनकार

प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च मरीज और उसके परिवार के लिए पहले ही बड़ी चुनौती है। ऊपर से दवाओं, इंजेक्शन और इलाज में इस्तेमाल होने वाले छोटे-छोटे सामान की कीमतों पर अस्पतालों की मनमानी का बोझ भी उठाना पड़ता है।

By anuj mainaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 04:51:30 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 04:51:30 PM (IST)
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महंगे मेडिकल सामान और दवाओं की मनमानी पर नहीं लगेगी रोक, मार्जिन तय करने से NPPA का इनकार
महंगे मेडिकल सामान और दवा

HighLights

  1. अस्पतालों में मेडिकल सामान पर मार्जिन तय करने से NPPA का इनकार
  2. बाहर से दवा व जांच कराने की छूट NPPA के अधिकार क्षेत्र से बाहर
  3. आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने पीएम को लिखा था पत्र

अनुज मैना, नईदुनिया, भोपाल। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च मरीज और उसके परिवार के लिए पहले ही बड़ी चुनौती है। ऊपर से दवाओं, इंजेक्शन और इलाज में इस्तेमाल होने वाले छोटे-छोटे सामान की कीमतों पर अस्पतालों की मनमानी का बोझ भी उठाना पड़ता है। कई अस्पतालों में मरीज के परिजनों को बाहर से दवाएं और मेडिकल सामान खरीदने की अनुमति नहीं दी जाती।

अस्पताल के अपने मेडिकल स्टोर से ही खरीदारी की मजबूरी के बीच सामान्य बाजार कीमत से कई गुना अधिक वसूली की शिकायतें कई बार सामने आती रही हैं। इस मनमानी से राहत दिलाने की मांग पर देश की दवा मूल्य नियामक संस्था ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।


अस्पतालों में ग्लव्स, सिरिंज, कैथेटर और दूसरे मेडिकल सामान की कीमतों पर नियंत्रण, बाहर से दवाएं खरीदने की आजादी और बिल में खरीद कीमत का ब्योरा देने जैसी मांगों पर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने साफ कहा है कि ये उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।

अधिकतम 30 प्रतिशत मुनाफे की सीमा तय करने की उठाई थी मांग

एनपीपीए ने यह बात आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के जवाब में कही है। चंद्रशेखर गौड़ ने पत्र में प्राइवेट अस्पतालों में दवाओं और मेडिकल सामान की बिक्री पर अधिकतम 30 प्रतिशत मुनाफे की सीमा तय करने जैसी पांच मांगें की थीं। उनका तर्क था कि अस्पतालों में मरीज के परिजनों को कई बार वहीं के मेडिकल स्टोर से सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। ऐसे में बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध ग्लव्स, सिरिंज और अन्य सामान अस्पताल में कई गुना महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है।

पत्र में की गई पांच मांगें और एनपीपीए का जवाब

शिकायत की मांग और उस पर एनपीपीए का जवाब इस प्रकार है...

  • दवाओं और मेडिकल सामान पर मुनाफे की 30 प्रतिशत सीमा तय कर अधिसूचना जारी की जाए - एनपीपीए ने बताया कि अपनी 152वीं बैठक में गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर मुनाफे की सीमा लागू की है। अन्य दवाओं और मेडिकल सामान पर 30 प्रतिशत सीमा लागू करने की मांग पर अलग निर्णय नहीं बताया।
  • डॉक्टर पर्चे पर ब्रांड के बजाय दवा का जेनेरिक या साल्ट नाम स्पष्ट रूप से लिखें - एनपीपीए ने कहा कि जेनेरिक नाम से दवा लिखने का मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
  • अस्पताल में भर्ती मरीज को बाहर से दवा और जांच कराने की आजादी, जिससे अस्पताल मना न कर सकें - एनपीपीए ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।
  • अस्पताल के बिल में दवाओं और महंगे मेडिकल सामान की खरीद कीमत, मुनाफा और एमआरपी अलग-अलग बताएं - पारदर्शी बिलिंग एनपीपीए के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
  • अस्पताल में बोर्ड लगाए जाएं कि मरीज अस्पताल की फार्मेसी या लैब से सेवा लेने के लिए बाध्य नहीं है। उल्लंघन पर कार्रवाई हो और हेल्पलाइन 1075 पर महंगी दवाओं की शिकायत के लिए अलग शिकायत विंडो बनाई जाए - एनपीपीए ने मरीज अधिकार चार्टर और शिकायत व्यवस्था को भी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।

कैंसर रोधी दवाओं के मार्जिन युक्तिकरण की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध

पत्र के जवाब में एनपीपीए की सदस्य सचिव एस. अहलादिनी पांडा ने अपने जवाब में कहा कि ट्रेड मार्जिन को अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने के लिए एनपीपीए ने अपनी 152वीं प्राधिकरण बैठक में गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन युक्तिकरण लागू किया है। इसकी विस्तृत जानकारी प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध है। वहीं, डॉक्टरों द्वारा जेनेरिक नाम से दवाएं लिखने, मरीजों को अपनी पसंद की फार्मेसी और जांच केंद्र चुनने, अस्पतालों की बिलिंग में पारदर्शिता तथा मरीज अधिकार चार्टर से जुड़े मुद्दे एनपीपीए के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं।

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