नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (इएसबी) की ओर से सेवारत शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने में अंतिम तारीख शुक्रवार है।
करीब डेढ़ लाख शिक्षकों में से अब तक लगभग ढाई हजार शिक्षकों ने ही आवेदन किया है। कम आवेदन को देखते हुए आवेदन की समय-सीमा बढ़ाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
इएसबी ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर 21 अगस्त से चार सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। परीक्षा 12 अक्टूबर से आयोजित की जानी है, जबकि अभ्यर्थी नौ सितंबर तक आवेदन में संशोधन कर सकेंगे।
वहीं, शिक्षक संगठनों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों से आवेदन नहीं करने की अपील की है।संगठनों का तर्क है कि कम आवेदन होने से सरकार पर परीक्षा निरस्त करने का दबाव बनेगा।
शिक्षकों की सूची जारी करने की मांग
इएसबी की नियम पुस्तिका में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के संबंधित शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य बताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। हालांकि, परीक्षा के दायरे में आने वाले शिक्षकों के नाम और कुल संख्या स्कूल शिक्षा विभाग ने अब तक स्पष्ट नहीं किए हैं।शिक्षक संगठन इस सूची को जारी करने की मांग कर रहे हैं।
एक प्रश्न-पत्र के लिए एक हजार रुपये शुल्क
टीईटी के एक प्रश्न-पत्र के लिए 1000 रुपये परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन में संशोधन के लिए भी अलग शुल्क तय किया गया है। शिक्षक संगठनों ने परीक्षा शुल्क लेने पर आपत्ति जताई है।
अध्यादेश लाकर परीक्षा निरस्त करने की मांग
वहीं ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष डीके सिंगौर ने कहा कि केंद्र सरकार को अध्यादेश लाकर परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करनी चाहिए। साथ ही संतान संबंधी जानकारी अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए। इस कालम को हटा देना चाहिए।
वहीं, शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि आरटीई अधिनियम के तहत पहले से नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि किन शिक्षकों को परीक्षा देनी है और किन्हें नहीं। स्थिति स्पष्ट होने तक परीक्षा आयोजित नहीं की जानी चाहिए।