
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए अब हर जिले में अलग से फिजियोथैरेपी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। इन अस्पतालों में न केवल एडवांस मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि विषय विशेषज्ञों द्वारा मरीजों का उपचार भी किया जाएगा। इसी क्रम में 'भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ' के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से मुलाकात कर बजट प्रावधानों की रूपरेखा पर चर्चा की है। प्रदेश की स्वास्थ्य नीति और आगामी बजट में फिजियोथैरेपी के उत्थान के लिए कई प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
प्रदेश के समस्त शासकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथैरेपी का स्नातक (बीपीटी) और स्नातकोत्तर (एमपीटी) पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में फिजियोथैरेपी यूनिट स्थापित की जाएगी। प्रत्येक यूनिट में एक महिला और एक पुरुष फिजियोथैरेपिस्ट की अनिवार्य नियुक्ति होगी। मेडिकल कॉलेजों के सभी विभागों और जिला चिकित्सालयों में विशेषज्ञता के आधार पर फिजियोथैरेपिस्ट तैनात किए जाएंगे। प्रदेश की शासकीय संस्थाओं में पदस्थ फिजियोथैरेपिस्ट के लिए एक समान और सम्मानजनक वेतन/मानदेय लागू किया जाएगा।
घोषणा को मिलेगा बजट का आधार, गौरतलब है कि पूर्व चिकित्सा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग पांच जनवरी 2026 को सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथैरेपी पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा कर चुके हैं। विधानसभा में भी स्वास्थ्य विभाग ने इस घोषणा की पुष्टि की है। अब आगामी बजट में इन योजनाओं के लिए राशि आवंटित की जाएगी, जिससे फिजियोथैरेपी चिकित्सा को खेलो इंडिया से लेकर फिट इंडिया तक के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी।
फिजियोथैरेपी में अब आर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी जैसे विषयों में विशेषज्ञता (एमपीटी) के साथ पीएचडी भी उपलब्ध है। बजट में इन प्रावधानों से मरीजों को विशेषज्ञों द्वारा सही इलाज मिलना सुनिश्चित होगा। यह बात भौतिक चिकित्सा कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. सुनील पाण्डेय ने कही है।
यह भी पढ़ें- ऑनलाइन गेम के कर्ज ने नाबालिग को बनाया चोर, घर में ही लगाई सेंध, मां के 15 लाख के जेवर किए पार