
धनंजय प्रताप सिंह, नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से कई अवसरों पर बयान, क्रियाकलापों और असहज करने वाले तर्कों से अपनी ही लोकप्रियता पर ग्रहण लगाते रहे हैं। ऐसे मामलों को समेटना कांग्रेस के लिए हमेशा से मुश्किल भरा रहा है और राजनीतिक परिपक्वता पर संदेह घटने का नाम नहीं ले रहा है। दतिया विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में जीत से कांग्रेस उत्साहित है और मिशन-2028 की अघोषित शुरुआत राहुल गांधी के 19 सितंबर के इंदौर दौरे से करना चाहती है।
राहुल गांधी "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम में 50 हजार (कांग्रेस के अनुसार) जेन-जी युवाओं को संबोधित करेंगे। कांग्रेस इसे सिर्फ छात्रों का ही आयोजन साबित करने के लिए दावा कर रही है कि यह आयोजन झंडा, डंडा और बैनर आदि से मुक्त होगा। आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में 1.41 करोड़ से अधिक युवा मतदाता हैं। 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 11,81,747 मतदाता हैं। ऐसे में कांग्रेस की नजर जेन-जी पर दिखाई पड़ती है। कार्यक्रम में 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को ही प्रवेश मिलेगा।
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पेपर लीक, परीक्षा व भर्तियों में अनियमितता, बेरोजगारी, शिक्षा के व्यावसायीकरण सहित अन्य मुद्दों पर संवाद करने के लिए कांग्रेस इसी आयोजन के साथ सभी शहरों, कस्बों, विश्वविद्यालयों, कालेजों और प्रतियोगी परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की गूंज अभियान शुरू करेगी। राहुल गांधी के दौरे को विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखने की दूसरी वजह यह भी है कि कांग्रेस छात्रों के बहाने जेन-जी पर फोकस तो करेगी ही, साथ ही मालवांचल के धार, रतलाम, खंडवा, आलीराजपुर, झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्र में भी संदेश देना चाहेगी। यहां जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) का प्रभाव है।
आदिवासी समुदाय को अपने पाले में रखने की कांग्रेस और भाजपा के बीच खींचतान हमेशा से रही है क्योंकि इस समुदाय का लगभग 82 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है। उसके रुझान के बिना मध्य प्रदेश में सत्ता की राह कभी आसान नहीं रही। मालवा में किसानों को भी संदेश देने के अनुसार यह आयोजन कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण होगा। इन सभी तथ्यों के बीच कांग्रेस की उम्मीदों और राहुल गांधी की राजनीतिक परिपक्वता पर चर्चा के लिए पिछले मामलों को देखना होगा। नवंबर, 2022 में राहुल गांधी की "भारत जोड़ो यात्रा’ महू से होते हुए इंदौर पहुंची थी।
उम्मीद थी कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इसका खासा असर पड़ेगा, लेकिन कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2018 में कांग्रेस को 114 सीटें मिली थीं, जबकि वर्ष 2023 में वह 66 पर सिमट गई। जनवरी, 2025 में महू में आयोजित सभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महाकुंभ को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या गंगा में डुबकी लगाने से युवाओं को रोजगार मिल जाएगा, गरीबी दूर हो जाएगी या खाना मिल जाएगा? इसे लेकर कांग्रेस मुश्किल में पड़ गई थी। जून, 2025 में भोपाल में आयोजित संगठन सृजन अभियान में राहुल गांधी ने अपने ही वरिष्ठ नेताओं पर तल्ख टिप्पणी कर दी थी।
उन्होंने युवाओं को तवज्जो देने के फेर में कह दिया था कि जो लंगड़े, बूढ़े और बारात के घोड़े हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। वैसे तो उनके इस संकेत का कोई प्रभाव पार्टी पर नहीं पड़ा और किसी वरिष्ठ नेता को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया, लेकिन इस बयान ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं की हर तरफ काफी किरकिरी कर दी।
पार्टी इस बयान को लेकर इस कदर असहज हुई कि न सफाई देते बनी, न इसे सही ठहराने की कोशिश की गई। दरअसल, राहुल गांधी के साथ मुश्किल यह रहती है कि उनके लिए तैयारी जोर-जोर से की जाती हैं, संदेश देने के सारे तत्व एकत्र कर लिए जाते हैं, लेकिन अंततः मामला कहीं ना कहीं जाकर बिगड़ जाता है।
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राहुल गांधी की इंदौर यात्रा की बड़ी तैयारी कांग्रेस कर रही है। उसे उम्मीद है कि जिस तरह पिछले दिनों में छात्रों के साथ संवाद में राहुल गांधी जेन-जी से जुड़ रहे हैं, ऐसी सफलता इंदौर में मिलने से कांग्रेस की स्थिति मजबूत होगी, लेकिन मुश्किल यह है कि वर्तमान में कांग्रेस के संगठन से लेकर जनप्रतिनिधि के स्तर तक जेन-जी को बेहद कम अवसर दिए गए हैं।
40 साल से कम उम्र के गिने-चुने ही जनप्रतिनिधि या पार्टी पदाधिकारी कांग्रेस की तरफ से हैं। ऐसे में युवा वर्ग को कांग्रेस से जोड़ने का संदेश देना और उसे धरातल पर उतारना कांग्रेस के लिए कठिन चुनौती होगी। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस राहुल गांधी के परिपक्व छवि को लेकर भी बेहद संभल कर चल रही है इसलिए अंत भला तो सब भला की उम्मीद लगाकर ही कांग्रेस बैठी है।